नई दिल्ली। इस साल रिकॉर्ड ऊंचाई छूने वाली चांदी (Silver) में अब बड़ी गिरावट देखने को मिल रही है। 29 जनवरी को 4,20,048 रुपये प्रति किलोग्राम के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंची चांदी (Silver) का भाव महज चार महीनों में टूटकर 11 जून तक 2,30,493 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गया है। यानी निवेशकों को ऊपरी स्तर से करीब 45 फीसदी की गिरावट झेलनी पड़ी है। ऐसे में बाजार में बड़ा सवाल उठ रहा है कि क्या यह खरीदारी का मौका है या चांदी में गिरावट अभी और बाकी है?
क्या 1.50 लाख रुपये तक फिसल सकती है चांदी?
कमोडिटी रिसर्च फर्म Kedia Advisory की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, चांदी में गिरावट का दौर अभी थमा नहीं है। रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी की कीमत 50 डॉलर प्रति औंस के अहम स्तर से नीचे फिसलकर 48.60 डॉलर प्रति औंस तक जा सकती है। यदि ऐसा होता है, तो घरेलू बाजार में चांदी का भाव करीब 1.60 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक आ सकता है।
डॉलर की मजबूती बनी दबाव की वजह
विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर इंडेक्स लगातार मजबूत हो रहा है, जिसका सीधा असर कमोडिटी बाजार पर पड़ता है। मजबूत डॉलर आमतौर पर सोना और चांदी जैसी धातुओं को कमजोर करता है, जिससे कीमतों में दबाव बढ़ जाता है।
गोल्ड-सिल्वर रेश्यो भी दे रहा संकेत
विश्लेषकों का कहना है कि गोल्ड-सिल्वर रेश्यो भी चांदी की चाल तय करने में अहम भूमिका निभा रहा है। जब यह अनुपात बढ़ता है, तो चांदी अपेक्षाकृत कमजोर पड़ती है। रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2025 के मध्य में यह रेश्यो 107 तक पहुंचा था, तब चांदी में सुस्ती थी। इसके बाद जब यह घटकर 43 पर आया, तो चांदी ने तेज रफ्तार पकड़ते हुए 4.20 लाख रुपये प्रति किलोग्राम का रिकॉर्ड स्तर छू लिया।
अब यह रेश्यो दोबारा बढ़कर 63 तक पहुंच गया है और अगले तीन महीनों में इसके 72 तक जाने की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में बाजार जानकार मान रहे हैं कि चांदी में निकट भविष्य में दबाव बना रह सकता है।
हालांकि, कुछ निवेशक इसे लंबी अवधि के लिए खरीदारी का अवसर भी मान रहे हैं, क्योंकि चांदी की औद्योगिक मांग और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां भविष्य में फिर तेजी ला सकती हैं।
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