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सोनम वांगचुक की बिगड़ी तबीयत एम्स जोधपुर में हुई जांच सुप्रीम कोर्ट मांगेगा मेडिकल रिपोर्ट

February 01, 2026

नई दिल्ली । जोधपुर सेंट्रल जेल(Jodhpur Central Jail) में बंद सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk)की तबीयत बिगड़ गई है। शनिवार सुबह उन्हें मेडिकल जांच (medical examination)के लिए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान(Medical Sciences ) यानी एम्स जोधपुर(AIIMS Jodhpur) ले जाया गया। बताया जा रहा है कि वांगचुक पिछले कई महीनों से पेट से जुड़ी गंभीर समस्याओं से जूझ रहे हैं। उनकी सेहत को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा जिसके बाद अदालत ने जेल प्रशासन को विशेषज्ञ डॉक्टर से जांच कराने के निर्देश दिए थे।

सोनम वांगचुक 27 सितंबर 2025 से जोधपुर सेंट्रल जेल में बंद हैं। उनके वकील और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी थी कि जेल में उपलब्ध खराब पानी की वजह से उनके मुवक्किल को लगातार पेट दर्द गैस और गैस्ट्रो से जुड़ी समस्याएं हो रही हैं। कोर्ट में यह भी बताया गया कि वांगचुक की तबीयत धीरे धीरे बिगड़ती जा रही है और सामान्य इलाज से कोई खास सुधार नहीं हो रहा।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जेल प्रशासन को निर्देश दिया था कि सोनम वांगचुक को किसी विशेषज्ञ डॉक्टर खासतौर पर गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट को दिखाया जाए। इसी आदेश के तहत शनिवार सुबह पुलिस सुरक्षा में उन्हें जोधपुर सेंट्रल जेल से एम्स जोधपुर ले जाया गया। एम्स सूत्रों के अनुसार वांगचुक को अस्पताल के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग में ले जाया गया जहां करीब डेढ़ घंटे तक उनकी विस्तृत जांच की गई।

बताया जा रहा है कि सोनम वांगचुक पेट से जुड़ी लगातार समस्याओं से परेशान हैं। वह शुक्रवार को भी मेडिकल जांच के लिए एम्स जोधपुर लाए गए थे। डॉक्टरों की टीम ने उनकी स्थिति का आकलन किया और जरूरी मेडिकल टेस्ट किए। जांच के बाद उन्हें वापस जेल ले जाया गया। सुप्रीम कोर्ट ने सोनम वांगचुक की मेडिकल रिपोर्ट 2 फरवरी तक पेश करने के निर्देश दिए हैं।

यह मामला सुप्रीम कोर्ट में सोनम वांगचुक की पत्नी की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया है। सुनवाई के दौरान वांगचुक के पक्ष ने अदालत को बताया कि उनकी सेहत लगातार गिर रही है और जेल में उपलब्ध सुविधाएं उनकी बीमारी के लिए पर्याप्त नहीं हैं। इस पर अदालत ने स्पष्ट किया कि कैदियों के स्वास्थ्य से कोई समझौता नहीं किया जा सकता और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ इलाज उपलब्ध कराया जाना चाहिए।


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    बीते गुरुवार को हुई सुनवाई में जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पीबी वराले की पीठ ने साफ तौर पर जेल अधिकारियों को आदेश दिया था कि सोनम वांगचुक की जांच गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट से कराई जाए। राजस्थान सरकार की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने कोर्ट को बताया था कि पिछले चार महीनों में जेल के डॉक्टरों द्वारा सोनम वांगचुक की 21 बार जांच की जा चुकी है और 26 जनवरी को भी उनकी मेडिकल जांच हुई थी।

    हालांकि इस दलील पर आपत्ति जताते हुए कपिल सिब्बल ने कहा था कि सामान्य जांच पर्याप्त नहीं है क्योंकि असली समस्या जेल के खराब पानी से पैदा हुई है। इसी के बाद सुप्रीम कोर्ट ने विशेषज्ञ जांच का आदेश दिया। अब सभी की निगाहें सोनम वांगचुक की मेडिकल रिपोर्ट पर टिकी हैं जो सुप्रीम कोर्ट में पेश की जाएगी और आगे की कार्रवाई उसी के आधार पर तय होगी।

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