
नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट के दिग्गज खिलाड़ी और सौरव गांगुली (Sourav Ganguly) ने अपनी प्रतिष्ठा को कथित रूप से नुकसान पहुंचाने वाले सोशल मीडिया (Social Media) कंटेंट के खिलाफ कानूनी कदम (Legal Step) उठाया है। उन्होंने कोलकाता (Kolkata) के ठाकुरपुकुर थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया है कि कुछ सोशल मीडिया मंचों के जरिए उनकी छवि को धूमिल करने का प्रयास किया जा रहा है। शिकायत में उन्होंने संबंधित व्यक्तियों और समूहों के खिलाफ भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (Board Of Control For Cricket In India) के तहत कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
गांगुली की शिकायत का केंद्र एक फेसबुक पेज है, जिसे उनके नाम से संचालित किए जाने का दावा किया जाता है। शिकायत के अनुसार, इस पेज पर बड़ी संख्या में फॉलोअर्स मौजूद हैं और इसे उनके आधिकारिक समर्थक मंच के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। पूर्व कप्तान का आरोप है कि इस मंच के माध्यम से ऐसे पोस्ट साझा किए जा रहे हैं, जो उनकी व्यक्तिगत और पेशेवर प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाले हैं। उनका कहना है कि इन पोस्टों के कारण आम लोगों के बीच उनके बारे में गलत धारणाएं बनने की आशंका पैदा हो रही है।
शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि केवल सोशल मीडिया पोस्ट ही नहीं, बल्कि कुछ अन्य ऑनलाइन माध्यमों पर भी भ्रामक सामग्री प्रसारित की गई है। गांगुली ने पुलिस को उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों के माध्यम से यह दिखाने का प्रयास किया है कि संबंधित सामग्री उनकी छवि को प्रभावित करने की मंशा से प्रकाशित की गई है। उन्होंने मामले की गंभीर जांच कर दोषियों की पहचान करने की मांग की है।
अपने आवेदन में सौरव गांगुली ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक जीवन में आलोचना को वह स्वाभाविक मानते हैं और इससे उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि तथ्यहीन, अपमानजनक और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाली सामग्री को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर स्वीकार नहीं किया जा सकता। उनका मानना है कि किसी भी व्यक्ति की सामाजिक और पेशेवर साख को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से झूठी या भ्रामक जानकारी फैलाना गंभीर मामला है और इसके खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई होनी चाहिए।
पुलिस अधिकारियों ने शिकायत प्राप्त होने की पुष्टि की है। अधिकारियों के अनुसार मामले की प्रारंभिक जांच शुरू कर दी गई है और शिकायत में लगाए गए आरोपों की सत्यता की जांच की जा रही है। जांच के दौरान संबंधित सोशल मीडिया खातों, पोस्टों और उनसे जुड़े तकनीकी पहलुओं का भी परीक्षण किया जा सकता है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास करेगी कि संबंधित सामग्री किसने तैयार की और उसके प्रसार में किन लोगों की भूमिका रही।
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब हाल के दिनों में सौरव गांगुली का नाम कुछ राजनीतिक अटकलों और सोशल मीडिया चर्चाओं में भी सामने आया था। कुछ रिपोर्टों में विभिन्न राजनीतिक संदेशों और संपर्कों को लेकर दावे किए गए थे, जिनका बाद में संबंधित पक्षों ने खंडन किया। गांगुली ने सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया था कि उनसे जुड़ी कई बातें तथ्यात्मक रूप से सही नहीं थीं और उन्हें गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया था।
डिजिटल युग में सोशल मीडिया की बढ़ती पहुंच के बीच यह मामला एक बार फिर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर प्रसारित होने वाली सामग्री की जवाबदेही और विश्वसनीयता को लेकर चर्चा का विषय बन गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि सार्वजनिक व्यक्तित्वों के साथ-साथ आम नागरिकों के लिए भी प्रतिष्ठा से जुड़े मामलों में कानूनी संरक्षण महत्वपूर्ण है और तथ्यहीन सामग्री के प्रसार पर प्रभावी निगरानी आवश्यक है।
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