
इंदौर। इंदौर में यात्री बसों के संचालन में लापरवाही और दबंगई का खेल थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला सुभाष ट्रेवल्स (Subhash Travels) की बस का है, जहाँ यात्रियों की सुरक्षा को ताक पर रखकर उन्हें ‘भेड़-बकरियों’ की तरह बस के अंदर ही नहीं, बल्कि बस की छत पर भी बिठाया जा रहा है।
छत पर बैठे दिखे 10-15 यात्री
रविवार को इंदौर से राजगढ़ की ओर जा रही सुभाष ट्रेवल्स की बस (नंबर MP13ZM6216) का एक हैरान करने वाला वीडियो सामने आया। वीडियो में देखा जा सकता है कि बस के अंदर पैर रखने की जगह नहीं है और बस की छत पर कम से कम 10-15 लोग अपनी जान जोखिम में डालकर बैठे हुए हैं। बस की रफ़्तार तकरीबन 90 से ऊपर थी। तेज रफ्तार में चलती बस के ऊपर बैठे ये यात्री किसी भी बड़े हादसे का शिकार हो सकते थे।
जिम्मेदारों की नाक के नीचे ‘ओवरलोडिंग’ का खेल
प्राइवेट बस संचालकों द्वारा अधिक मुनाफे के चक्कर में नियमों को ताक पर रखना आम बात हो गई है। सुभाष ट्रेवल्स जैसी बसें खुलेआम आरटीओ नियमों का उल्लंघन कर रही हैं, लेकिन प्रशासन की ‘खामोशी’ कई सवाल खड़े करती है।
क्या कहता है कानून?
यात्री बसों को परमिट एक निश्चित मानक और बैठने की क्षमता (Sitting Capacity) के आधार पर दिया जाता है। परमिट से अधिक सवारी बिठाना कानूनन अपराध है। बस की छत पर यात्रियों को बिठाना पूरी तरह प्रतिबंधित और आपराधिक श्रेणी में आता है। मोटर व्हीकल एक्ट 1988 (MV Act 1988) के सेक्शन 192 के तहत ओवरलोडिंग पर भारी आर्थिक जुर्माना और बस का परमिट रद्द करने का प्रावधान है।
खतरे में यात्रियों की जान
जानकारों का मानना है कि बस की छत पर यात्री बैठने से बस का सेंटर ऑफ ग्रेविटी (Center of Gravity) बिगड़ जाता है, जिससे मोड़ पर या तेज रफ्तार में बस के पलटने का खतरा 80% तक बढ़ जाता है। अगर कोई अनहोनी होती है, तो जान-माल का बड़ा नुकसान तय है।
क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? सुभाष ट्रेवल्स की इस मनमानी और यात्रियों की जान से खिलवाड़ पर कड़ी कार्रवाई की जरूरत है। इंदौर परिवहन विभाग को चाहिए कि वे ऐसे बस संचालकों के परमिट तुरंत प्रभाव से निरस्त करें।
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