
इंदौर। गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को क्या सावधानी रखना चाहिए, कब जांच कराना जरूरी है और खानपान कैसा होना चाहिए, ऐसी जानकारियां अब डिजिटल माध्यम से भी मिल रही हैं। स्वास्थ्य विभाग की सुमन हेल्पडेस्क पहल के तहत सुमन सखी चैटबॉट के जरिए गर्भवती महिलाओं और उनके परिवारों तक स्वास्थ्य संबंधी जानकारी पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
विभाग द्वारा सुमन हेल्पडेस्क के माध्यम से स्वास्थ्यकर्मियों और लाभार्थियों के बीच संपर्क मजबूत करने तथा जरूरतमंद महिलाओं का फॉलोअप करने का प्रयास किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की इस पहल में डिजिटल माध्यमों के साथ स्वास्थ्यकर्मियों की भूमिका भी अहम है, ताकि गर्भवती महिलाओं को सही जानकारी के साथ समय पर चिकित्सकीय सहायता मिल सके। स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, 1 अप्रैल से 30 सितंबर 2026 तक की प्रगति रिपोर्ट में सुमन सखी चैटबॉट के तहत 23,500 का आंकड़ा दर्ज किया गया है। हालांकि, यह आंकड़ा किस इकाई को दर्शाता है, इसकी पुष्टि रिपोर्ट से स्पष्ट नहीं होती है।
जांच से लेकर खानपान तक की जानकारी
सुमन सखी चैटबॉट का उद्देश्य गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान जरूरी जानकारी उपलब्ध कराना है। इसमें नियमित स्वास्थ्य जांच, पौष्टिक भोजन, खून की कमी से बचाव, प्रसव की तैयारी और नवजात शिशु की देखभाल जैसे विषयों पर जानकारी प्राप्त करने में मदद मिल सकती है। गर्भावस्था के दौरान कोई परेशानी होने पर डॉक्टर से समय पर संपर्क करने के लिए भी जागरूक किया जाता है।
हाईरिस्क गर्भवती महिलाओं पर नजर
स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, छह माह के दौरान आगामी 15 दिनों में प्रसव संभावित 2,005 महिलाओं का रिकॉर्ड दर्ज किया गया। हाईरिस्क प्रेग्नेंसी यानी जोखिम वाली गर्भावस्था के 1,911 फॉलोअप दर्ज किए गए। इसके अलावा, लाभार्थियों से संपर्क के लिए 10,846 कॉल और रेफरल से जुड़े 899 मामले दर्ज किए गए। रिपोर्ट में 1,859 मध्यम एनीमिया, 134 गंभीर एनीमिया, 312 जीडीएम पॉजिटिव और 269 पीआईएच मामले भी दर्ज हैं। इन महिलाओं को समय पर जांच और डॉक्टर की सलाह मिलना जरूरी है।
स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने का प्रयास
सुमन हेल्पडेस्क के तहत सीएचओ द्वारा 575 और एएनएम द्वारा 784 कॉल दर्ज किए गए। इस पहल का उद्देश्य गर्भवती महिलाओं से संपर्क बनाए रखना, जरूरी स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी देना और जरूरत पड़ने पर उन्हें अस्पताल तक पहुंचाने में मदद करना है। स्वास्थ्य विभाग की इस पहल से डिजिटल माध्यम के जरिए मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। समय पर जांच, उचित उपचार और सुरक्षित प्रसव पर ध्यान देकर मां और बच्चे के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
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