
नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव रोकने के लिए बने नियम पर (Regarding rules framed to curb caste-based discrimination in Higher Educational Institutions) केंद्र सरकार और यूजीसी जवाब दे (Central Government and UGC to Respond) ।
उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव रोकने के लिए यूजीसी द्वारा बनाए गए नए नियम को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को सुनवाई टल गई। कोर्ट ने केंद्र सरकार और यूजीसी को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। साथ ही कहा कि जवाब की कॉपी सभी याचिकाकर्ताओं को भी दी जाए। अगली सुनवाई चार हफ्ते बाद होगी। याचिकाकर्ताओं ने शिकायत की थी कि उन्हें केंद्र और यूजीसी के जवाब की कॉपी नहीं मिली है। पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के इस नियम पर अंतरिम रोक लगा दी थी और केंद्र सरकार तथा यूजीसी को नोटिस जारी किया था।
यूजीसी ने 13 जनवरी 2026 को ‘उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने संबंधी नियम, 2026’ अधिसूचित किया था। इसी नियम के एक प्रावधान को याचिका में चुनौती दी गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि नियम का खंड 3(सी) मनमाना और भेदभावपूर्ण है। इससे कुछ वर्गों के छात्रों को उच्च शिक्षा से बाहर किया जा सकता है। यह प्रावधान संविधान में दिए गए समानता के अधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता जैसे मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है।
इसके अलावा याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह नियम विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम, 1956 के खिलाफ है। उनके मुताबिक इससे उच्च शिक्षा में सभी को समान अवसर देने के उद्देश्य को नुकसान पहुंचेगा। यूजीसी ने यह नियम कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में जाति के आधार पर होने वाले भेदभाव को रोकने के लिए बनाया था। लेकिन अब कोर्ट में इसे लेकर कानूनी बहस शुरू हो गई है। अब सभी पक्षों का जवाब आने के बाद सुप्रीम कोर्ट चार हफ्ते बाद इस मामले पर आगे सुनवाई करेगा।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved