नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने कहा है कि अगर किसी अभियुक्त की सजा पहले ही निलंबित कर दी गई हो और उसे जमानत दे दी गई हो, तो उससे अपीलीय कार्यवाही (Appellate Proceedings) के दौरान नियमित रूप से अदालत में मौजूद होने की मांग करना गैर जरूरी है। हरियाणा में चलन में यह व्यवस्था रही है, जिस पर संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने ये टिप्पणी की है।
सजा निलंबित होने के बाद भी जारी हुआ वारंट
चेक बाउंस मामले में अपीलकर्ता को दोषी ठहराया गया था। अपील के दौरान उसकी सजा निलंबित कर जमानत दी गई। अपीलीय अदालत ने बाद में जमानत रद्द कर गैर-जमानती वॉरंट जारी किया।
सड़क का कोई धार्मिक कैरेक्टर नहीं होता: HC
मद्रास हाई कोर्ट ने कहा है कि सड़कों का कोई धार्मिक कैरेक्टर नहीं होता। अदालत ने सड़क पर बने ईसाई धार्मिक स्थल के खिलाफ एक्शन का निर्देश दिया। हाई कोर्ट ने 22 जनवरी को दिए आदेश में ग्रेटर चेन्नै कॉरपोरेशन को कार्रवाई जल्द पूरी करने का निर्देश दिया।
कोर्ट ने पाया कि ढांचा एक सार्वजनिक सड़क पर था। तमिलनाडु अर्बन लोकल बॉडीज एक्ट की धारा 128 के तहत ऐसे अतिक्रमणों को हटाना नगर निगम अधिकारियों की विधायी ड्यूटी है। अदालत ने कहा कि सड़कों का कोई धार्मिक कैरेक्टर नही होता। अगर कोई स्ट्रक्चर धार्मिक हो या गैर-धार्मिक अगर वह किसी सार्वजनिक स्थान पर अतिक्रमण है, तो आयुक्त उसे हटाने को वैधानिक रूप से बाध्य है।
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