
नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट (Middle East) में जारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान (America and Iran) के बीच स्विट्जरलैंड (Switzerland) में हुई उच्चस्तरीय वार्ता पहले ही दौर में विवादों में घिर गई। लगभग 80 मिनट तक चली इस बैठक के बाद हालात इतने तनावपूर्ण हो गए कि बातचीत को बीच में ही रोकना पड़ा।
यह बैठक हाल ही में हुए अंतरिम समझौते के बाद दोनों देशों के बीच चल रही व्यापक वार्ता का हिस्सा थी, जिसका उद्देश्य क्षेत्रीय संघर्ष को कम करना और पिछले चार महीनों से जारी तनाव को समाप्त करने की दिशा में आगे बढ़ना था।
लेबनान मुद्दे पर टकराव से बिगड़े हालात
बैठक में सबसे बड़ा विवाद लेबनान में जारी सैन्य कार्रवाई और इजरायल से जुड़े मुद्दों पर देखने को मिला। ईरान ने आरोप लगाया कि अमेरिका समझौते की शर्तों के तहत पूर्ण सीजफायर सुनिश्चित कराने में विफल रहा है, और इसका उदाहरण लेबनान में जारी संघर्ष है।
वार्ता से पहले ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने कतर और पाकिस्तान के मध्यस्थों से अलग-अलग बातचीत भी की थी। ईरान ने साफ किया था कि आगे की प्रगति इस बात पर निर्भर करेगी कि अमेरिका जमीन पर समझौते को कितनी गंभीरता से लागू कराता है।
ट्रंप के बयान से बढ़ा तनाव
वार्ता के दौरान तनाव उस समय और बढ़ गया जब पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से लेबनान को लेकर सोशल मीडिया पर की गई टिप्पणी सामने आई। ईरान ने इसे धमकी के रूप में देखा, जिसके बाद ईरानी प्रतिनिधिमंडल कुछ समय के लिए बैठक से बाहर चला गया।
बाद में ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बगेर ग़ालिबफ़ ने कहा कि अमेरिका को अपने बयानों में सावधानी बरतनी चाहिए और ईरान किसी भी स्थिति में जवाब देने के लिए तैयार है।
80 मिनट की बातचीत, सीमित प्रगति
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरानी प्रतिनिधिमंडल के बीच हुई इस बैठक में प्रतिबंधों में राहत और फ्रीज संपत्तियों को जारी करने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई, लेकिन ठोस सहमति नहीं बन सकी। कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार, बातचीत के दौरान माहौल कई बार तनावपूर्ण हुआ, जिससे आगे की प्रक्रिया बाधित हुई।
प्रतीकात्मक औपचारिकताओं से दूरी
वार्ता के दौरान ईरानी पक्ष ने प्रतीकात्मक हैंडशेक और संयुक्त फोटो जैसे औपचारिक कदमों से भी दूरी बनाए रखी, जिसे दोनों देशों के बीच बढ़ते अविश्वास का संकेत माना जा रहा है।
इजरायल और क्षेत्रीय स्थिति
इसी बीच इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि दक्षिणी लेबनान में इजरायली सैन्य मौजूदगी फिलहाल जारी रहेगी और सुरक्षा कारणों से यह आवश्यक है।
तेल बाजार पर असर
अमेरिका-ईरान वार्ता में आए गतिरोध का असर वैश्विक तेल बाजार पर भी दिखा है। ब्रेंट क्रूड की कीमत में तेजी दर्ज की गई और यह 81 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता बढ़ी है।
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