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1980 की वो हिंदी फिल्म, जो जापानी और हॉलीवुड फिल्मों से थी प्रेरित, बनने में लगे 5 साल

March 28, 2026

 नई दिल्ली। बॉलीवुड के इतिहास(history of Bollywood) में कई ऐसी फिल्में रही हैं, जो अपने समय से आगे की सोच और बड़े पैमाने पर निर्माण के लिए जानी जाती हैं। ऐसी ही एक फिल्म है द बर्निंग ट्रेन(The Burning Train), जो 1980 में रिलीज(released in 1980) हुई थी और दर्शकों को रोमांच और डर से भर दिया था। यह फिल्म सिर्फ अपनी मल्टीस्टार कास्ट के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी दिलचस्प कहानी और निर्माण में लगे लंबे समय के कारण भी चर्चा में रही।

5 साल में तैयार हुई मल्टीस्टारर फिल्म

इस फिल्म का ऐलान अगस्त 1976 में हुआ था, लेकिन इसे पर्दे तक आने में पूरे पांच साल लग गए। मार्च 1980 में रिलीज हुई इस फिल्म की शुरुआत बेहद शानदार रही और सिनेमा में 100% ऑक्यूपेंसी देखने को मिली। हालांकि, समय के साथ इसकी कमाई में गिरावट आई और फिल्म बॉक्स ऑफिस पर औसत साबित हुई। इसके बावजूद, इसकी भव्यता और कहानी ने इसे एक खास पहचान दिलाई।

तीन विदेशी फिल्मों से ली गई प्रेरणा

कम ही लोग जानते हैं कि द बर्निंग ट्रेन की कहानी पूरी तरह नई नहीं थी, बल्कि यह तीन विदेशी फिल्मों से प्रेरित थी। इसमें जापानी फिल्म द बुलेट ट्रेन और हॉलीवुड की द टावरिंग इन्फर्नो और द कैसेंड्रा क्रॉसिंग शामिल हैं। इन फिल्मों के अलग-अलग कॉन्सेप्ट को मिलाकर एक दमदार और रोमांचक कहानी तैयार की गई है।

कहानी में रोमांच और आपदा का संगम

जापानी फिल्म द बुलेट ट्रेन में ट्रेन में बम लगाकर उसे तेज गति पर चलने के लिए मजबूर किया जाता है, जबकि द टावरिंग इन्फर्नो से आपदा के दौरान इंसानी भावनाओं और संघर्ष को अपनाने का विचार लिया गया। वहीं द कैसेंड्रा क्रॉसिंग से “चलती ट्रेन में सीमेंट लोगों के जीवन-मरण के संकट” का एंगल जोड़ा गया। इन सभी तत्वों को मिलाकर एक ऐसी कहानी बनाई गई, जिसमें आग से घिरी ट्रेन में सीमेंट यात्रियों की जिंदगी और उनके संघर्ष को दिखाया गया।

स्टारकास्ट ने फिल्म को शानदार बनाया

फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसकी मल्टीस्टार कास्ट थी। इसमें धर्मेंद्र, हेमा मालिनी, विनोद खन्ना, जीतेंद्र, परवीन बाबी और नीतू सिंह जैसे दिग्गज कलाकार नजर आए। इन सभी कलाकारों ने अपने दमदार अभिनय से फिल्म को यादगार बना दिया।

निर्देशन और खास पहचान

फिल्म का निर्देशन रवि चोपड़ा ने किया था, जो मशहूर फिल्मकार बी. आर. चोपड़ा के बेटे हैं। अपने बड़े पैमाने पर, तकनीकी प्रयोग और भावनात्मक कहानी के कारण यह फिल्म आज भी बॉलीवुड की क्लासिक डिजास्टर फिल्मों में गिनी जाती है।

  • आज भी चर्चा में क्यों है?

    भले ही फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बड़ी सफलता हासिल नहीं कर पाई, लेकिन इसकी कहानी, तकनीक और स्टारकास्ट ने इसे एक अलग पहचान दी। आज भी द बर्निंग ट्रेन को भारतीय सिनेमा की उन फिल्मों में मिलती है, जिन्होंने बड़े स्तर पर आपदा-आधारित कहानी को पेश करने का साहस दिखाया।

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