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मोहम्मद रफी का वो किस्सा, रीटेक से इनकार कर फिर गाया अमर गीत

June 04, 2026

नई दिल्ली । बॉलीवुड(Bollywood) की क्लासिक फिल्म(classic Bollywood film) जंजीर(Zanjeer) का गाना “दीवाने हैं दीवानों को”(Deewane Hain Deewanon Ko) आज भी श्रोताओं के दिलों में बसा हुआ है। इस गाने को संगीत दिया था मशहूर संगीतकार जोड़ी कल्याणजी-आनंदजी ने, जबकि इसके बोल लिखे थे गीतकार गुलशन बावरा ने। रिकॉर्डिंग के दौरान जब यह गाना पहली बार तैयार हुआ, तो इसे सभी ने पसंद किया। खासकर लता मंगेशकर का गाया हिस्सा बेहद प्रभावशाली माना गया। लेकिन लता जी अपने काम में पूर्णता की पक्षधर थीं, इसलिए उन्होंने एक और रीटेक की मांग रख दी।

स्टूडियो में बढ़ा तनाव, लेकिन रफ़ी ने क्यों किया इनकार?
रीटेक की बात जब मोहम्मद रफ़ी तक पहुंची, तो उन्होंने शुरुआत में साफ इनकार कर दिया। वजह बेहद इंसानी थी-वे उस समय रोज़े में थे और सुबह से उन्होंने न तो खाना खाया था और न ही पानी पिया था। उनकी हालत ऐसी थी कि दोबारा उसी ऊर्जा और भाव के साथ गाना उनके लिए कठिन हो रहा था। इसी कारण उन्होंने स्टूडियो छोड़ने का फैसला कर लिया।

अचानक बदला माहौल, और फिर लौटे स्टूडियो
जैसे ही रफ़ी साहब स्टूडियो से बाहर निकले, उनकी मुलाकात गीतकार गुलशन बावरा से हुई। उन्होंने उत्साहित होकर बताया कि फिल्म में यह गाना वही गा रहे हैं। यह सुनकर रफ़ी साहब चौंक गए, क्योंकि उन्होंने गाना अमिताभ बच्चन के हावभाव और व्यक्तित्व को ध्यान में रखकर गाया था। यह एहसास उन्हें वापस स्टूडियो खींच लाया। उन्होंने बिना देर किए फिर से रिकॉर्डिंग करने का फैसला किया।

भूखे-प्यासे फिर गूंज उठी आवाज़ और बन गया इतिहास
इसके बाद मोहम्मद रफ़ी ने उसी हालत में, बिना कुछ खाए-पिए, दोबारा गाना रिकॉर्ड किया। इस बार उनकी आवाज में और भी गहराई, भाव और दर्द महसूस किया गया। रिकॉर्डिंग पूरी हुई और गाना रिलीज़ होते ही सुपरहिट साबित हुआ। यह किस्सा आज भी संगीत जगत में अनुशासन, समर्पण और कला के प्रति जुनून की मिसाल के रूप में याद किया जाता है।


  • संगीत की दुनिया का अमर सबक
    यह घटना सिर्फ एक गाने की कहानी नहीं, बल्कि उस दौर के कलाकारों की संवेदनशीलता और प्रोफेशनलिज्म का प्रतीक है। लता मंगेशकर की परफेक्शन की चाह और रफ़ी साहब की भावनात्मक प्रतिबद्धता ने इस गाने को अमर बना दिया। आज भी जब यह गीत बजता है, तो श्रोता सिर्फ संगीत नहीं सुनते, बल्कि उस संघर्ष और समर्पण को महसूस करते हैं जो इसके पीछे छिपा है।

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