
इंदौर। प्राधिकरण जहां अपनी टीपीएस योजनाओं के विकास कार्य में जुटा है और अभी टीपीएस-9 के लिए भी लगभग 60 करोड़ रुपए के टेंडर जारी किए हैं। दूसरी तरफ तीन नई टीपीएस योजनाओं का भी प्रस्ताव लम्बित पड़ा है, जो कि टीपीएस-11, 12, 13 के नाम से लागू की जाना थी। आवासीय, थोक वाणिज्यिक और मार्ग के लिए इन तीन योजनाओं का क्रियान्वयन तत्कालीन कलेक्टर ने 6 माह के लिए रूकवाया था, क्योंकि भू-अर्जन के कारण इंदौर, उज्जैन सहित प्रदेशभर में किसानों द्वारा आंदोलन किए जा रहे थे। मगर अब प्राधिकरण बोर्ड को इन तीनों योजनाओं पर जल्द निर्णय लेना पड़ेगा। फरवरी माह में बोर्ड बैठक होना है।
बीते 4-5 माह से वैसे भी प्राधिकरण की गतिविधियां ठप पड़ी है, क्योंकि सीईओ के तबादले के बाद नए अधिकारी को समझने में ही समय लग रहा है, तो अभी एक महीने की ट्रेनिंग पर भी सीईओ डॉ. परीक्षित झाड़े गए हुए हैं जो सोमवार को लौटेंगे और उसके पश्चात ही प्राधिकरण बोर्ड की बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें संभव है कि जो नई तीन टीपीएस योजनाएं अधर में लटकी है उन पर निर्णय लिया जाए। दरअसल, प्रदेशभर में जो किसान आंदोलन एक साथ भू-अर्जन को लेकर शुरू हुए, जिसमें प्राधिकरण के साथ-साथ एमपीआईडीसी, रेलवे सहित अन्य विभागों के खिलाफ धरने-प्रदर्शन, ट्रैक्टर रैली निकाली गई। यहां तक कि उज्जैन सिंहस्थ के लिए भी जो जमीनें ली जाना थी, उन्हें भी शासन को छोडऩा पड़ा।
लिहाजा तत्कालीन कलेक्टर आशीष सिंह ने प्राधिकरण सीईओ को पत्र लिखते हुए तीनों प्रस्तावित योजनाओं को 6 महीने टालने को कहा था। अब 6 महीने होने आए हैं, लिहाजा बोर्ड को टीपीएस-11, 12 और 13 पर निर्णय लेना पड़ेगा। टीपीएस-11 में नावदा पंथ की जमीनें, तो टीपीएस-12 में निहालपुरमुंडी और टीपीएस-13 में कनाडिय़ा की जमीनें ली जाना है। इन योजनाओं का उद्देश्य आवासीय के साथ-साथ थोक वाणिज्यिक मंडी और मार्ग बताया गया और खंडवा रोड की तरफ प्राधिकरण ने पहली बार योजनाएं घोषित की, जिसमें यह भी दावा किया गया कि छोटे और भूखंड निम्र और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए भी इन योजनाओं में उपलब्ध कराए जाएंगे। अब फरवरी माह में प्राधिकरण की जो बोर्ड बैठक होगी उसमें इन तीन योजनाओं का भी प्रस्ताव शामिल किया जाएगा।
यह भी उल्लेखनीय है कि प्राधिकरण ने पिछले साल अहिल्या पथ की योजना भी घोषित की थी, जिसमें 6 टीपीएस योजनाएं घोषित थी। मगर शासन ने इसकी अनुमति नहीं दी। नतीजतन अहिल्या पथ योजनाएं भी अधर में लटकी है। शासन ने प्राधिकरण को निर्देश दिए थे कि उसने एक तरफ ही योजना डाली, लिहाजा दूसरी ओर की जमीनें भी शामिल करें। मगर प्राधिकरण की परेशानी यह है कि अहिल्या पथ के दूसरी तरफ आवासीय उपयोग की जमीनें नहीं है, बल्कि कृषि यानी एग्रीकल्चर यूज की जमीनें हैं। प्राधिकरण कृषि जमीनों पर योजनाएं घोषित नहीं कर सकता, जिसके कारण अहिल्या पथ प्रोजेक्ट ही उलझा पड़ा है। शासन ने चूंकि इंदौर का नया मास्टर प्लान भी ठंडे बस्ते में डाल रखा है, अगर उसका प्रारुप प्रकाशन भी हो जाता तो उसके आधार पर प्राधिकरण अहिल्या पथ की योजना घोषित कर सकता था।
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