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भारतीय सेना का सुपर रोबोटिक डॉग, एक रिमोट से चढ़ जाएगा ऊंची पहाड़ों पर

January 09, 2026

जयपुर। भारतीय सेना (Indian Army) में शामिल हुए रोबोटिक म्यूल ने सेना का काम काफी आसान कर दिया है। दुर्गम स्थानों पर गोला बारूद, हथियार या भोजन सामग्री (Food ingredients) सहित अन्य सामान पहुंचाने में अब रोबोटिक म्यूल (Robotic Mule) का इस्तेमाल किया जाने लगा है। दो साल पहले इसे भारतीय सेना में शामिल किया गया था। इससे पहले भारी भरकम सामान सैनिकों को अपने कंधों पर ले जाना पड़ता था लेकिन अब यह काम रोटोबिट म्यूल करता है। आम भाषा में लोग इसे रोबोट डॉग के नाम से जानते हैं।



  • ऊंची पहाड़ी हो या उबड़ खाबड़ रास्ता, नहीं डगमगाता
    साल 2023 में इस रोबोटिक म्यूल को मिलिट्री इंटेलिजेंस में शामिल किया गया। जैसे एक इंसान जमीन पर चलता है। ठीक वैसे ही यह रोबोटिक म्यूल चलता है। चाहे ऊंची पहाड़ी हो, उबड़ खाबड़ रास्ता हो, अचानक चढाई या ढलान हो। हर तरह के दुर्गम रास्तों में यह रोबोटिक म्यूल आसानी से चल सकता है। इसे रिमोट के जरिए कंट्रोल किया जाता है। आर्मी ऑफिसर कहते हैं कि इस रोबोटिक म्यूल के चारों ओर कैमरे लगे होते हैं। रिमोट से कंट्रोल करने वाला जवान इस पर नजर रखता है। जहां रास्ता दिखाई देता है, उस दिशा में इसे चलाया जाता है। इसकी कोई रेंज लिमिट नहीं हैं। जहां तक नेटवर्क मिलता रहेगा। तब तक इसे कंट्रोल करते हुए चलाया जा सकता है।

    रात्रि गश्त करने में भी माहिर
    यह रोबोटिक म्यूल 1 क्विंटल तक वजन उठा सकता है। कहीं गोला बारूद पहुंचाना हो या सैन्य जवानों के लिए भोजन और दवाइयों सहित अन्य सामग्री भिजवानी हो। ऐसे में इस रोबोटिक म्यूल का उपयोग किया जाता है। यह नदी को भी पार कर सकता है और ऊंची पहाड़ी पर भी आसानी से चढ़ सकता है। इसके जरिए रात्रि गश्त भी की जाने लगी है। लेटेस्ट टेक्नोलॉजी के इलेक्ट्रो-ऑप्टिक्स और इंफ्रारेड टेक्नोलॉजी से लैस रोटोबिक म्यूल रात्रि गश्त करने में भी माहिर है। इन्हें एआई मोड से संचालित कर निगरानी रखी जा सकती है।

    आर्मी डे की परेड में शामिल रोबोटिक म्यूल
    आर्मी डे के मौके पर पहली बार सैन्य छावनी के बाहर जयपुर की सड़कों पर सेना परेड हो रही है। परेड में अलग-अलग रेजिमेंट की टुकड़ियों के साथ रोबोटिक म्यूल को भी शामिल किया गया है। जयपुर के भवानी निकेतन परिसर में लगाई गई सेना की प्रदर्शनी में भी रोबोटिक म्यूल का प्रदर्शन किया गया है।

    सर्दी और गर्मी बेअसर
    इस रोबोटिक म्यूल पर सर्दी और गर्मी का कोई असर नहीं होता है। सेना के अधिकारियों का कहना है कि यह माइनस 40 डिग्री सेल्सियस के तापमान में भी आसानी से चल सकता है और अधिकतम 55 डिग्री सेल्सियस के तापमान में भी चल सकता है। भारतीय सेना में यह आधुनिकीकरण का एक बड़ा हिस्सा है।

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