
उज्जैन। आजादी के 75 साल बाद भी हम शहरों में पीने का साफ पानी लोगों को नहीं दे सकते तो फिर गांव की और निचली बस्तियों में रहने वाले लोगों की क्या हालत होगी..उज्जैन शहर में अधिकांश नलों से गंदा पानी आता है और जिन क्षेत्रों में चौड़ीकरण हुआ है वहाँ स्थिति और अधिक भयावह है। आज सुबह निजातपुरा क्षेत्र के लोग जो जलप्रदाय हुआ उसका गंदा पानी बर्तनों में लेकर धरने पर बैठ गए।
उन्होंने नगर निगम और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए जल्द समस्या का समाधान करने की मांग की। कोयला फाटक से कंठाल तक सड़क चौड़ीकरण के बाद पूरे मार्ग पर घरों तक पेयजल पहुंचाने के लिए करीब छह महीने पहले भूमिगत वाटर सप्लाई लाइन डाली गई थी। इसके बावजूद निजातपुरा क्षेत्र में शनिवार सुबह जलप्रदाय के दौरान नलों से गंदा पानी आने लगा। रहवासियों का कहना था कि जब नई पाइपलाइन डाली जा चुकी है, तो फिर घरों में बदबूदार पानी क्यों पहुंच रहा है? पेयजल जैसी बुनियादी जरूरत के लिए भी लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है। धरने पर बैठे रहवासियों ने आरोप लगाया कि गंदे पानी की समस्या को लेकर वे कई बार नगर निगम में शिकायत कर चुके हैं। पहले भी इस परेशानी को लेकर प्रदर्शन किए गए, लेकिन स्थिति में सुधार नहीं हुआ। लोगों का कहना था कि शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी समस्या को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। नई पाइपलाइन डालने के बाद भी यदि घरों तक साफ पानी नहीं पहुंच रहा है, तो व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। नागरिकों ने मांग की कि नलों से आ रहे गंदे और बदबूदार पानी की जांच कराई जाए तथा इसकी वजह का पता लगाकर तत्काल सुधार किया जाए। उन्होंने नगर निगम और संबंधित विभाग के अधिकारियों से साफ पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की। रहवासियों का कहना था कि नई पाइपलाइन डालने का उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब लोगों को घरों में पीने योग्य पानी मिलने लगेगा।
इंदौर की घटना कहीं उज्जैन में घटित न हो जाए
रहवासियों ने इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल से हुई मौतों का हवाला देते हुए कहा कि गंदे पानी की शिकायतों को नजरअंदाज करना गंभीर लापरवाही साबित हो सकती है। उनका कहना था कि समय रहते पेयजल की गुणवत्ता की जांच और समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो लोगों की सेहत पर खतरा बढ़ सकता है।
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