
नई दिल्ली। इतिहास खुद को दोहराता है. वेनेजुएला (Venezuela) के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो (Nicolas Maduro) को जिस तरह से अमेरिका (America) की ट्रंप सरकार ने सत्ता से बेदखल कर उन्हें गिरफ्तार किया है, उसने तकरीबन 36 साल पहले की यादें ताजा कर दीं. तब अमेरिका की बुश (सीनियर) सरकार ने पहले पनामा के शासक नोरीएगा को पकड़ा और फिर उनपर उन्हीं आरोपों में मुकदमा चलाया गया, जिनमें मादुरो को आरोपी बनाया गया है. वेनेजुएला की घटना ने पनामा ऑपरेशन की याद दिला दी है. पनामा ऑपरेशन के बाद इराक के राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन को भी पकड़ कर फांसी पर लटका दिया गया था.
दुनिया के राजनीतिक इतिहास में कई घटनाएं ऐसी होती हैं, जो समय बीतने के बाद भी खुद को दोहराती नजर आती हैं. कुछ ऐसा ही उदाहरण हाल के दिनों में देखने को मिला है, जब अमेरिका ने दावा किया कि उसने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार कर लिया है. इस घटना ने करीब 36 साल पहले पनामा में हुए उस सैन्य अभियान की याद दिला दी, जब अमेरिका ने पनामा के तानाशाह मैनुएल नोरीएगा को पकड़ने के लिए देश पर हमला किया था. बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 3 जनवरी को कहा कि अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला में बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई करते हुए राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को हिरासत में लिया है. अमेरिका लंबे समय से मादुरो पर ड्रग तस्करी और आतंकवादी गिरोहों से संबंध रखने का आरोप लगाता रहा है. वर्ष 2020 में अमेरिकी अदालत में मादुरो पर भ्रष्टाचार, ड्रग तस्करी और अन्य गंभीर आरोपों में मुकदमा भी दर्ज किया गया था. अमेरिका ने उनकी गिरफ्तारी या सजा से जुड़ी जानकारी देने पर 5 करोड़ डॉलर के इनाम की घोषणा की थी.
क्या है पनामा ऑपरेशन?
यह पहला मौका नहीं है जब अमेरिका ने किसी लैटिन अमेरिकी देश में जाकर वहां के शासक को ड्रग तस्करी के आरोप में पकड़ा हो. इससे पहले 1989 में अमेरिका ने पनामा पर हमला कर वहां के शासक मैनुएल नोरीएगा को गिरफ्तार किया था. यह घटना आज भी अंतरराष्ट्रीय राजनीति और अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप का बड़ा उदाहरण मानी जाती है. मैनुएल नोरीएगा का उदय पनामा की राजनीति में उस समय हुआ, जब साल 1968 में ओमार टोरिजोस ने तख्तापलट कर सत्ता संभाली. नोरीएगा को टोरिजोस के तहत सैन्य खुफिया प्रमुख बनाया गया. वह बेहद चतुर, लेकिन निर्दयी माना जाता था. अपने पद का इस्तेमाल कर उसने कई विरोधियों को गायब करवाया और सेना के भीतर भ्रष्ट सौदों को अंजाम दिया.
दिलचस्प बात यह है कि 1970 तक नोरीएगा अमेरिका की खुफिया एजेंसी CIA के लिए काम करने लगा. शीत युद्ध के दौर में उसने मध्य अमेरिका में साम्यवाद को रोकने में अमेरिका की मदद की. पनामा में अमेरिकी खुफिया ठिकाने बनाने और अमेरिका समर्थक सेनाओं तक मदद पहुंचाने में नोरीएगा की अहम भूमिका रही. 1981 में ओमार टोरिजोस की विमान हादसे में मौत के बाद नोरीएगा पनामा का वास्तविक शासक बन गया. इसी दौरान उसने कोलंबिया के कुख्यात ड्रग माफिया पाब्लो एस्कोबार जैसे अपराधियों से हाथ मिला लिया. पनामा के बैंकों के जरिए ड्रग के पैसों को सफेद करने और अमेरिका तक कोकीन पहुंचाने में नोरीएगा की भूमिका सामने आई. बदले में उसे करोड़ों डॉलर की रिश्वत मिली. अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को नोरीएगा की इन गतिविधियों की जानकारी थी, लेकिन साम्यवाद के खिलाफ उसकी उपयोगिता के चलते लंबे समय तक उस पर कार्रवाई नहीं की गई. यहां तक कि 1980 के दशक में ईरान-कॉन्ट्रा घोटाले में भी नोरीएगा की अहम भूमिका रही, जहां गुप्त रूप से हथियार और ड्रग्स की तस्करी कर अमेरिका समर्थित गुटों की मदद की गई.
फिर कैसे हुई टकराव की शुरुआत?
समय के साथ अमेरिका और नोरीएगा के रिश्ते बिगड़ने लगे. अमेरिका को शक हुआ कि नोरीएगा अन्य देशों की खुफिया एजेंसियों के लिए भी काम कर रहा है. इसके बाद अमेरिका ने उससे दूरी बनानी शुरू कर दी. वर्ष 1988 में अमेरिका की एक अदालत ने नोरीएगा पर ड्रग तस्करी के आरोप तय कर दिए. 1989 में हालात और बिगड़ गए, जब नोरीएगा ने उस राष्ट्रपति चुनाव को रद्द कर दिया, जिसमें विपक्ष की जीत तय मानी जा रही थी. इसके बाद पनामा की नेशनल असेंबली ने उसे ‘सर्वोच्च नेता’ घोषित किया और अमेरिका के खिलाफ युद्ध की स्थिति घोषित कर दी. इसी दौरान नोरीएगा ने हथियार लहराते हुए अमेरिका को खुली धमकी भी दे डाली. अगले ही दिन पनामा सिटी में अमेरिकी सैनिकों पर हमला हुआ, जिसमें एक अमेरिकी मरीन की मौत हो गई. इस घटना ने अमेरिका को सीधी सैन्य कार्रवाई के लिए मजबूर कर दिया.
क्या है ऑपरेशन जस्ट कॉज?
तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज एच. डब्ल्यू. बुश (सीनियर) ने ‘ऑपरेशन जस्ट कॉज’ शुरू करने का आदेश दिया. दिसंबर 1989 में करीब 26 हजार अमेरिकी सैनिक पनामा में घुस गए. कुछ ही दिनों में पनामा की सेना को हरा दिया गया, लेकिन नोरीएगा फरार हो गया. आखिरकार वह वेटिकन दूतावास में जा छिपा. अमेरिकी सेना दूतावास में घुस नहीं सकती थी, इसलिए उसने मनोवैज्ञानिक युद्ध का सहारा लिया. दूतावास के बाहर बड़े-बड़े स्पीकर लगाकर तेज आवाज में रॉक और हेवी मेटल संगीत बजाया गया. यह सिलसिला कई दिनों तक चला. लगातार शोर और दबाव के बाद 3 जनवरी 1990 को नोरीएगा ने आत्मसमर्पण कर दिया. उसे अमेरिका ले जाया गया, जहां ड्रग तस्करी के आरोपों में उसे सजा सुनाई गई. उसने करीब 20 साल अमेरिकी जेलों में बिताए और 2017 में 83 साल की उम्र में उसकी मौत हो गई. अमेरिका ने 3 जनवरी को घोषणा की कि उसने वेनेजुएला पर अटैक कर राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार कर लिया है. मादुरो के साथ हुई घटना ने नोरीएगा की कहानी को फिर से सामने ला दिया है.
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