
डेस्क: दुनियाभर में हर साल जब खुशहाल देशों की सूची जारी की जाती है, तो नॉर्वे (Norway) और डेनमार्क (Denmark) का नाम सबसे ऊपर होता है, लेकिन अब दोनों ही मुल्क अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की वजह से टेंशन में आ गए हैं. डेनमार्क को तो अपनी संप्रभुता खोने का डर तक सता रहा है. इसकी वजह ग्रीनलैंड का होना है. वहीं नॉर्वे रूस सीमा से लगा है, जिसे ट्रंप की ढुलमुल रवैए की वजह से विश्वयुद्ध का खतरा बढ़ने का डर लग रहा है. नॉर्वे ने अपने नागरिकों को युद्ध के लिए तैयार रहने के लिए कहा है. नॉर्वे ने इसके लिए 13 हजार नागरिकों को पत्र भी भेजा है, जिसमें कहा है कि आपसे जंग की स्थिति में घर लिया जा सकता है.
डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर दावा कर दिया है. दावोस की मीटिंग में ट्रंप ने कहा कि अगर मुझे ग्रीनलैंड नहीं मिलता है तो मैं यह याद रखूंगा. ग्रीनलैंड अभी डेनमार्क का हिस्सा है. डेनमार्क ने इसे बचाने के लिए सैनिकों को तैनात करने का फैसला किया है. वॉल स्ट्रीट जनरल के मुताबिक यहां के लोग टेंशन में सो नहीं पा रहे हैं.
एक्सियोस के मुताबिक ग्रीनलैंड अमेरिका के लिए काफी अहम है. यह रूस और अमेरिका के बीच में स्थित है. अगर कोई मिसाइल व्हाइट हाउस पर छोड़ा जाता है तो ग्रीनलैंड के रास्ते यह मिसाइल 26 मिनट में पहुंच सकता है. ग्रीनलैंड से अमेरिका की दूरी सिर्फ 15 मिनट की है. डोनाल्ड ट्रंप ग्रीनलैंड को गोल्डेन डोम से कवर करना चाहते हैं. रिपोर्ट के मुताबिक डेनमार्क ने ग्रीनलैंड पर समझौता करने की हामी भर दी है.
नॉर्वे अमेरिका खासकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रडार पर आ गया है. हाल ही में ट्रंप ने नॉर्वे के प्रधानमंत्री को एक पत्र लिखा था, जिसमें कहा था कि मुझे आपके यहां से नोबेल नहीं मिला, इसलिए मैं अब शांति की पहल नहीं करूंगा. इतना ही नहीं, नॉर्वे ने भी ट्रंप के गाजा पीस बोर्ड में शामिल होने से इनकार कर दिया है. नॉर्वे ने अपने नागरिकों से भी कहा है कि विश्वयुद्ध की शुरुआत कभी भी हो सकती है, इसलिए सब लोग मानसिक रूप से तैयार रहें. द सन के मुताबिक नॉर्वे की सरकार ने आम नागरिकों को इसके लिए पत्र भी भेजा है.
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved