
नई दिल्ली: भारत के सबसे बड़े घरेलू क्रिकेट टूर्नामेंट रणजी ट्रॉफी का धमाकेदार आगाज हो गया है. लेकिन भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड की ओर से रणजी ट्रॉफी सीजन के बीच में ही इंडिया ए के न्यूजीलैंड दौरे का शेड्यूल तय करने पर गंभीर विवाद खड़ा हो गया है. भारत के पूर्व कप्तान और पूर्व चीफ सेलेक्टर दिलीप वेंगसरकर ने बीसीसीआई के इस फैसले की कड़े शब्दों में आलोचना की है. वेंगसरकर का मानना है कि देश के सबसे बड़े फर्स्ट क्लास टूर्नामेंट रणजी ट्रॉफी के चलते हुए शैडो टूर आयोजित करना भारत के घरेलू क्रिकेट के महत्व को सीधे तौर पर कम करता है.
ध्रुव जुरेल की कप्तानी में इंडिया ए की टीम को सीनियर टीम की टेस्ट सीरीज से पहले न्यूजीलैंड में 24 अक्टूबर से 7 नवंबर के बीच तीन टेस्ट मैच खेलने हैं. इसके चलते दौरे के लिए चुने गए ज्यादातर टॉप घरेलू खिलाड़ी रणजी ट्रॉफी के सिर्फ पहले राउंड में हिस्सा ले पाएंगे और टूर्नामेंट के बड़े हिस्से से बाहर रहेंगे.
बातचीत करते हुए दिलीप वेंगसरकर ने शेड्यूलिंग पर तीखा प्रहार किया और कहा, ‘जब रणजी ट्रॉफी का सीजन चल रहा है, तब इंडिया ए का दौरा रखने की क्या जरूरत है? फिर रणजी ट्रॉफी कराने का मतलब ही क्या रह जाता है? अपने ही घरेलू सीजन के दौरान इस तरह का शैडो टूर आयोजित करने का विचार चौंकाने वाला है, क्योंकि ऐसा करके आप अपने सबसे बड़े घरेलू टूर्नामेंट का महत्व गिरा रहे हैं.’
उन्होंने आगे तर्क दिया कि जब देश के स्टार खिलाड़ी रणजी ट्रॉफी के बजाए इंडिया ए के लिए खेल रहे होंगे, तो रणजी में रन बनाने और विकेट लेने वाले बाकी खिलाड़ियों के प्रदर्शन का मूल्यांकन भी कमजोर पड़ जाता है. वेंगसरकर ने कहा कि घरेलू सीजन के बीच में ऐसे दौरों का आयोजन उनकी समझ से परे है.
बीसीसीआई इन शैडो टूर्स का आयोजन इसलिए करता है ताकि सीनियर इंटरनेशनल दौरों से पहले रिजर्व और कतार में खड़े खिलाड़ियों को विदेशी परिस्थितियों का अनुभव मिल सके. हालांकि, वेंगसरकर ने इस दलील को भी खारिज करते हुए सुझाव दिया है. उनका मानना है कि अगर खिलाड़ियों को विदेशी परिस्थितियों और स्थानीय माहौल में ढालना ही प्राथमिकता है, तो सीनियर टेस्ट टीम को पहले भेजा जाना चाहिए. वेंगसरकर ने कहा कि उन खिलाड़ियों को दौरे पर भेजने का कोई मतलब नहीं बनता, जो सीनियर टेस्ट सीरीज का हिस्सा भी नहीं होने वाले हैं.
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