
चेन्नई। तमिलनाडु (Tamil Nadu) के मुख्यमंत्री और द्रमुक (DMK) अध्यक्ष एमके स्टालिन (MK Stalin) ने रविवार को ‘भाषा शहीद दिवस’ (Language Martyrs’ Day) के अवसर पर केंद्र सरकार (Central Government) को कड़ा संदेश देते हुए दोहराया कि राज्य में हिंदी (Hindi) थोपे जाने के लिए कोई जगह नहीं है। स्टालिन ने 1960 के दशक के हिंदी-विरोधी आंदोलन के बलिदानियों को याद करते हुए कहा कि तमिलनाडु अपनी भाषाई पहचान की रक्षा के लिए हमेशा अडिग रहेगा।
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर करते हुए लिखा, “भाषा शहीद दिवस के अवसर पर मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि तमिलनाडु में हिंदी के लिए न तब कोई जगह थी, न अब है और न कभी होगी।” उन्होंने एक वीडियो भी शेयर किया जिसमें 1965 के ऐतिहासिक हिंदी-विरोधी आंदोलन के संघर्ष को दिखाया गया है। इस वीडियो में द्रमुक के दिग्गज नेताओं सी. एन. अन्नादुरई और एम. करुणानिधि के योगदान को भी रेखांकित किया गया।
मुख्यमंत्री स्टालिन ने चेन्नई में “भाषा शहीद” थलामुथु और नटरासन के स्मारक पर जाकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस मौके पर उन्होंने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए चेन्नई महानगर विकास प्राधिकरण (CMDA) भवन पर इन दोनों शहीदों की प्रतिमाओं का अनावरण किया। स्टालिन ने कहा कि तमिलनाडु ने हिंदी-विरोधी आंदोलन का नेतृत्व कर पूरे भारतीय उपमहाद्वीप में विभिन्न भाषाई और राष्ट्रीय समूहों के अधिकारों और उनकी पहचान की रक्षा की है।
‘भाषा शहीद’ शब्द उन आंदोलनकारियों के लिए उपयोग किया जाता है जिन्होंने 1964-65 के दौरान तमिलनाडु में हिंदी को आधिकारिक भाषा बनाने के विरोध में अपनी जान गंवाई थी। उस समय कई युवाओं ने हिंदी थोपे जाने के खिलाफ आत्मदाह किया था। तभी से तमिलनाडु ‘दो भाषा सूत्र’ का पालन कर रहा है, जिसमें केवल तमिल और अंग्रेजी को प्राथमिकता दी जाती है।
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