
मलमास बीता तो अब होली के समय की चिंता
राज्य सरकार द्वारा निगम मंडल (Corporation Board) में नियुक्ति किए जाने की प्रतीक्षा कर रहे नेताओं (leaders) को अब नई चिंता सता रही है। अभी तक तो सरकार (Government) द्वारा यह कहते हुए नियुक्ति नहीं की जा रही थी कि मलमास चल रहा है। जैसे ही मलमास खत्म हुआ, वैसे ही वापस नेताओं के दिल में उम्मीद के दीपक जलने लगे। नेता इंदौर से भोपाल और दिल्ली जाकर अपने आका की परिक्रमा करने लगे। हर कोई उम्मीद में था कि इस बार तो नियुक्ति का पिटारा खुलेगा और उनकी चांदी हो जाएगी। प्रदेश भाजपा कार्यालय से इस बार भी संकेत जारी हो गए कि बस सरकार नियुक्ति करने वाली है। इन संकेतों के बीच ही समय गुजरता गया और रविवार को पूर्णिमा आ गई। इस दिन होली का डांडा गढ़ गया। अब इस दिन से लेकर होली का त्योहार मनाए जाने के दिन तक का समय नए और शुभ काम को करने के लिए उचित नहीं माना जाता है। वैसे तो अब इस अवधि में शादी विवाह से लेकर सारे शुभ काम होने लगे हैं। इसके बाद भी भाजपा के नेताओं को आशंका है कि कहीं ऐसा ना हो कि होली के दिनों के नाम पर एक बार फिर एक महीने के लिए नियुक्ति टाल दी जाए।
मुद्दे को जिंदा रखने का जतन
कांग्रेस के नेता भागीरथपुरा के दूषित जल के मुद्दे को जिंदा रखना चाहते हैं। इन नेताओं को यह तो अच्छी तरह से मालूम है कि राज्य सरकार की ओर से इस घटना में करने वाले लोगों के परिवार को अब मुआवजे के नाम पर कुछ नहीं मिलना है। इन नेताओं को यह भी समझ में आ गया है कि सरकार द्वारा जिम्मेदारी निर्धारण के नाम पर किसी का इस्तीफा भी नहीं लिया जाना है। कांग्रेस के नेता यह भी समझ गए हैं कि इस मामले में कोई आपराधिक प्रकरण भी दर्ज नहीं होना है। अब कांग्रेस के साथ समस्या यह है कि उन्हें भागीरथपुरा के मुद्दे को जिंदा रखना है। अब वह यह नहीं समझ पा रहे हैं कि इस मुद्दे को आखिर किस तरह से जिंदा रखा जाए। युवा कांग्रेस ने विधानसभा क्षेत्रवार पदयात्रा का आयोजन कर इस मुद्दे को फिर से हवा देने की कोशिश की, लेकिन यह कोशिश नाकाम रही। ऐसे में अब शहर कांग्रेस और जिला कांग्रेस मिलकर राजबाड़ा पर धरना देकर फिर से भागीरथपुरा के मुद्दे को जिंदा करने की कोशिश करेंगे। इस धरने के बाद आगे के आंदोलन के लिए इन नेताओं के पास भी कोई रणनीति नहीं है।
भाजपा में सन्नाटा
भारतीय जनता पार्टी में सन्नाटा पसरा हुआ है। प्रदेश संगठन की ओर से भी कोई कार्यक्रम नहीं आ रहा है। नगर इकाई की ओर से भी किसी तरह के संगठनात्मक कार्यक्रम का आयोजन नहीं किया जा रहा है। अभी बिल्कुल शांति है। शांति का यह दौर उस समय से शुरू हुआ जब से भागीरथपुरा का हादसा हुआ। किसी भी ज्वलंत मुद्दे पर भाजपा संगठन के पदाधिकारी पूरी तरह से खामोश रहते हैं। इस बारे में यह पदाधिकारी ही दबी जुबान कहते हैं की भोपाल से आदेश है कि किसी को कुछ नहीं बोलना है। ऐसा लगता है कि भोपाल के नेताओं को भी लग गया है कि इंदौर वाले कुछ बोलेंगे तो बोलना पड़ेगा कि बोलता है…
मीटिंग को मजाक बना दिया
पिछले दिनों प्रदेश के नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने रेसीडेंसी कोठी पर एलिवेटेड कॉरिडोर को लेकर बैठक ली थी। यह बैठक मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव द्वारा दिए गए निर्देश के तारतम्य में ली गई थी। बैठक में संभाग आयुक्त कलेक्टर महापौर सभी मौजूद थे। बैठक में पहुंचते ही मंत्री जी ने कहा कि क्या पावर पॉइंट प्रजेंटेशन की व्यवस्था नहीं है। इस पर लोक निर्माण विभाग की कार्यपालन यंत्री ने जवाब दिया की तैयारी नहीं हो सकी। प्रजेंटेशन तो नहीं होगा, लेकिन मुंह जबानी जानकारी दे देंगे। इस बैठक में भाग लेने के लिए लोक निर्माण विभाग के ब्रिज सेल के चीफ इंजीनियर भी नहीं आए। पूरी बैठक मजाक बनकर रह गई। इस मजाक पर जब सवाल उठे तो वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी ने कहा कि विभाग की कार्यपालन यंत्री बहुत जानती है। उन्हें चीफ इंजीनियर से ज्यादा प्रोजेक्ट की जानकारी है। इस पर तत्काल एक टिप्पणी हुई की प्रशासनिक अधिकारियों से ज्यादा उनके कार्यालय के बाबू किसी भी प्रोजेक्ट को लेकर जानते हैं। तो क्या अब अधिकारी की जगह बैठक में बाबू को भेज देंगे..?
पोर्टल रुक गया लेकिन नेताजी खुश
नगर निगम द्वारा अपना खुद का पोर्टल बनवाया गया था। यह पोर्टल बनकर तैयार हो गया लेकिन राज्य सरकार के द्वारा ई नगर पालिका पोर्टल से नगर निगम का डेटा देने से इनकार कर दिया गया। ऐसे में यह बना हुआ पोर्टल किसी काम का इस समय नहीं है। इस स्थिति के बावजूद नगर निगम के वे नेता खुश हैं, जिनके हित इस पोर्टल के साथ जुड़े हुए थे। उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता है कि यह पोर्टल चालू हो रहा है या नहीं हो रहा है उनका तो अपना काम हो गया है…
-डा जितेन्द्र जाखेटिया
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