
नेताजी के लिए बंद है दीनदयाल भवन का दरवाजा
प्रमोद टंडन (Pramod Tandon) कांग्रेस (Congress) के बाद भाजपा (BJP) में आए और भाजपा ने भी उन्हें हाथोहाथ लिया। उन्हें मंच पर बिठाया जाने लगा, जबकि कई कांग्रेसी नेताओं को ये नसीब नहीं हुआ, लेकिन उनकी बुद्धि पलटी और पिछले चुनाव के दौरान प्रदेश में कांग्रेस की सरकार वापस आती देख वे फिर से अपनी पुरानी पार्टी में पहुंच गए, लेकिन हुआ उलटा ही। अब प्रदेश में भाजपा सरकार को देख प्रमोद ने फिर गुलाटी मारने की सोची, लेकिन दीनदयाल भवन के बाहर से ही लौट आए, क्योंकि उनके लिए दीनदयाल भवन के दरवाजे बंद थे। स्थानीय नेता चाहकर भी उन्हें अंदर नहीं बुला सके। धार्मिक आयोजनों में जरूर वे भाजपा नेताओं के साथ नजर आ जाते हैं, लेकिन दीनदयाल भवन के अंदर घुसने का रास्ता अभी तक उन्हें नजर नहीं आया है और अंदर बैठे लोग भी कभी भोपाल का तो कभी टंडन का मुंह देखते रहते हैं।
खजराना के मुस्लिम नेता की वापसी
खजराना में भाजपा के एक नेता हैं इम्तियाज मेमन। पिछले एक साल वे सक्रिय राजनीति से दूर होकर गुजरात चले गए थे। कारण उन्होंने व्यक्तिगत बताया था, लेकिन जिस कौम से भाजपा को वोट नहीं मिलते हैं वहां ऐसे नेता का होना बिरला ही माना जाएगा। इम्तियाज मंडल अध्यक्ष रहे और विधायक हार्डिया के करीबी भी। अब एक बार फिर उन्होंने इंदौर में अपनी आमद दे दी है और कह रहे हैं वे इंदौर छोडक़र कहीं नहीं जाएंगे। शायद नेताजी को गुजरात रास नहीं आया। पिछले दिनों से वे अपनी पुरानी राजनीतिक बिसात पर ही नजर आ रहे हैं और दीनदयाल भवन पहुंचकर बता रहे हैं कि वे लौटकर घर को आ गए हैं।
ईमानदारी का इनाम
सहमीडिया प्रभारी रहे नितिन द्विवेदी को प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल ने अपनी टीम में भोपाल बुला लिया है। नितिन अकेले ऐसे व्यक्ति हैं, जिनके काम के बल पर उन्हें प्रदेश की मीडिया टीम में स्थान मिला है। अग्रवाल से नजदीकी का फायदा भी उन्हें मिला और लगातार पार्टी के हित में मीडिया से संवाद करने का भी। नितिन के साथ प्रभारी रहे रितेश तिवारी का तो इस पद से मोह भंग हो गया और वे अब अपने राजनीतिक आका गौरव रणदिवे के साथ प्रदेश की राजनीति में सक्रिय हो गए हैं। एक तरह से वे गौरव के पीआरओ की ही भूमिका निभा रहे हैं। वैसे टीम में कई ऐसे चेहरों को आशीष अग्रवाल को लेना पड़ा, जो किसी न किसी सिफारिश से आए हैं।
क्या मामा ने कुत्तों को माफ कर दिया?
एमआईसी सदस्य मनीष मामा को कुत्ते ने काट लिया तो इस पर टिप्पणी लाजमी थी। टिप्पणी मामा को काटा इसकी नहीं, बल्कि इसलिए हो रही थी कि अब कुत्तों के दिन फिरेंगे या फिर कुत्तों का यह कटकना जारी रहेगा। कुत्तों की शामत आना तय थी। आखिर मामा 2 नंबर के करीबी और एमआईसी मेंबर जो ठहरे। मामा की सुरक्षा में बंदूक वाला गार्ड रहता है, लेकिन वो भी मामा को कुत्तों से नहीं बचा पाया। होना तो यह चाहिए था कि कुत्ता पकड़ो अमला सडक़ पर उतरता और मामा को खुश करने को तो नहीं, बल्कि शहर के दूसरे लोगों को कुत्तों के काटने से बचाने के लिए कार्रवाई करता। कुत्तों ने भी राहत की सांस ली है कि मामा को काटे बहुत दिन हो गए, अब उनका कुछ होने वाला नहीं।
अकेला चना भाड़ तो फोड़ सकता है
कहावत है कि अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता, लेकिन इस कहावत को कांग्रेस के शहर अध्यक्ष चिंटू चौकसे झुठला रहे हैं। शहर के मुद्दों को लेकर उन्होंने निगम पर तो हल्ला बोल ही रखा है, उसके साथ ही अपनी ही पार्टी के विघ्नसंतोषियों से कैसे निपटा जाए, उसकी रणनीति में भी पास हो चुके हैं। चिंटू को जानने वाले कहते हैं कि पहली बार कोई जिद्दी नेता शहर कांग्रेस की कुर्सी पर बैठा है और ये जिद कांग्रेस को कम से कम ऑक्सीजन तो दे जाएगी।
टीनू को कहां ले जाएगा उनका भक्ति भाव
भाजपा के सहमीडिया प्रभारी रहे टीनू भक्ति भाव से भी जुड़ रहे हैं। चाहे हिंदू नववर्ष का आयोजन हो या फिर पिछले दिनों एक ही मंच पर जैन और हिंदू धर्म के संतों को बिठाकर सनातन पर बात करनी हो, उसमें वे सफल रहे हैं। वैसे टीनू के पिता भी धार्मिक आयोजनों में अग्रणी रहते हैं और टीनू भी उसी राह पर चल पड़े हैं। टीनू ने अपने पिता की 50वीं वर्षगांठ पर ऐसा मजमा जमाया कि कई वरिष्ठ भी देखते रह गए। अब टीनू का ये भक्ति भाव उन्हें कहां ले जाएगा ये तो समय ही बताएगा।
कोई कुरेदे तो सही…फिर तो सुमित…
नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता भी रह चुके हैं और वाकपाटुता के उस्ताद भी हैं। दिग्गी राजा के अयोध्या में जाकर दर्शन करने के मामले में उन्हें कुरेद दिया गया तो वे भड़भड़ा उठे और एक सवाल का कई तरह से जवाब दे दिया। उन्होंने कहा कि ये वही दिग्गी हैं, जो कभी राम का अस्तित्व नहीं मानते थे। इनकी ही पार्टी ने कोर्ट में हलफनामा तक दे दिया था कि राम कभी अस्तित्व में थे ही नहीं और रामसेतु काल्पनिक है। वैसे बोलने को तो सुमित खूब बोले और यह भी कहा कि दिग्गी को तो अपनी पूरी पार्टी को अयोध्या ले जाना चाहिए। हालांकि कांग्रेस के पास इसका कोई जवाब नहीं है, नहीं तो अभी तक पलटवार जरूर हो जाता। कांग्रेस में बोलने वालों की फौज हुआ करती थी, लेकिन उन्हें फिलहाल घर बिठा रखा है। वैसे टैलेंट हंट के नाम से नए बोलने वालों की तलाश शुरू हो गई है, ताकि मौके पर चौका लगाया जा सके।
उषा ठाकुर सहित कई विधायकों को पार्टी ने भाजपा का प्रदेश प्रवक्ता बना दिया है। उषा ठाकुर वैसे तो प्रदेश में मंत्री पद की दौड़ में थीं, लेकिन अचानक उन्हें पार्टी की तरफ से पद दे दिया गया। समर्थक मान रहे हैं कि चार बार की विधायक को प्रदेश प्रवक्ता बनाना एक तरह से उनका डिमोशन ही है, नहीं तो उन्हें मंत्री पद से नवाजा सकता था। -संजीव मालवीय
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