
उज्जैन। मार्च-अप्रैल की बेमौसम बारिश और ओलों ने आम के बगीचों को नुकसान पहुंचाया है। ऑन इयर होने के बावजूद इस बार आम की पैदावार घट सकती है। आम विशेषज्ञों के मुताबिक मौसम ने फलों के ‘क्रिटिकल फ्लावरिंग पीरियड’ को बिगाड़ दिया है।
आम के पेडों पर इस समय पेड़ों पर मंजरी (फूल) और शुरुआती फल बनने की प्रक्रिया चलती है, लेकिन नमी और तापमान में उतार-चढ़ाव से फूल झड़ रहे हैं। फंगल संक्रमण और परागण में कमी की समस्या भी बढ़ी है। देशभर में मौसम सामान्य नहीं रहने से दक्षिण भारत से आने वाली अर्ली वैरायटी की आवक सबसे ज्यादा प्रभावित होगी। सप्लाई घटने से आम के दाम बढऩे की आशंका है। जानकारों के अनुसार बारिश और नमी से एन्थ्रेक्नोज और पाउडरी मिल्ड्यू जैसे रोग बढ़ते हैं। तेज हवा से कच्चे फल गिर जाते हैं, जबकि कम धूप से शुगर फॉर्मेशन घटने से स्वाद प्रभावित होता है। परागण कम होने से फल बनने की दर भी घटती है। उन्होंने बताया कि नर्मदा वैली में हुए रिसर्च में पाया गया कि फ्लावरिंग के दौरान 2-3 बार अनियमित बारिश भी उत्पादन पर सीधा असर डालती है। इस बार बेमौसम बारिश और ओलों से कई इलाकों में फूल और कच्चे फल गिर चुके हैं। शहर में आम का सीजन अप्रैल के आखिर से जुलाई तक रहता है। शुरुआत में तोतापरी, दशहरी और राजापुरी बाजार में आते हैं। मई-जून में लंगड़ा, चौसा और केसर की आवक रहती है, जबकि जून-जुलाई में आम्रपाली, मलिका और बंगनपल्ली मिलते हैं। आम आमतौर पर मई के आखिरी सप्ताह से बाजार में आते हैं, लेकिन इस बार मौसम खराब होने से करीब 10 दिन की देरी संभव है।
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