नई दिल्ली। वाम उग्रवाद (Naxal) के खिलाफ चल रहे अभियान के बीच बड़ी सफलता सामने आई है। तेलंगाना पुलिस (Telangana Police) के सामने शीर्ष माओवादी नेता देवूजी (Devji) उर्फ थिप्पिरी तिरुपति ने आत्मसमर्पण कर दिया। उसके साथ तीन अन्य नक्सलियों ने भी हथियार डाल दिए। सुरक्षा एजेंसियां इसे माओवादी नेटवर्क के लिए बड़ा झटका मान रही हैं।
सेंट्रल मिलिट्री कमीशन का प्रभारी था देवूजी
सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, देवूजी संगठन के सेंट्रल मिलिट्री कमीशन का प्रभारी रह चुका था और रणनीतिक फैसलों में उसकी अहम भूमिका थी। वह लंबे समय से छत्तीसगढ़ के माड़ क्षेत्र से सक्रिय रहकर गतिविधियों का संचालन कर रहा था, जो माओवादी गतिविधियों का प्रमुख गढ़ माना जाता है।
1983 से था भूमिगत, संगठन में लगातार बढ़ता गया कद
देवूजी 1983 से अंडरग्राउंड था। उसने शुरुआती दौर में गढ़चिरौली क्षेत्र में दलम सदस्य के रूप में काम किया और बाद में एरिया कमेटी मेंबर बना।
2001 में उसे संगठन की केंद्रीय समिति में शामिल किया गया, जबकि 2016 में सेंट्रल मिलिट्री कमीशन की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
छात्र राजनीति से उग्रवाद तक का सफर
बताया जाता है कि पढ़ाई के दौरान ही उसका झुकाव कट्टर वामपंथी छात्र संगठन रेडिकल स्टूडेंट यूनियन की ओर हुआ, जिसके बाद उसने उग्रवादी रास्ता अपना लिया और दशकों तक संगठन में सक्रिय रहा।
नक्सलवाद के खिलाफ अभियान के बीच अहम घटना
सरकार ने देश में वाम उग्रवाद के खात्मे के लिए तय समयसीमा के भीतर अभियान तेज किया हुआ है। ऐसे में शीर्ष स्तर के नेता का सरेंडर सुरक्षा रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इससे संगठन की संचालन क्षमता और मनोबल पर असर पड़ सकता है।
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