वाशिंगटन । पाकिस्तान को आईना दिखाते हुए अमेरिका के रिपब्लिकन सांसद और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की पार्टी के नेता रिच मैककॉर्मिक (Rich McCormick) ने कहा है कि भारत के मुकाबले पाकिस्तान अमेरिका (Pakistan- America) में निवेश लाने में नाकाम रहा है।
वॉशिंगटन स्थित प्रतिष्ठित थिंक टैंक सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (CSIS) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए मैककॉर्मिक ने साफ कहा कि भारत न केवल निवेश आकर्षित करता है, बल्कि अमेरिका में खुद भी निवेश करता है।
मैककॉर्मिक ने ट्रंप प्रशासन को स्पष्ट संदेश दिया कि भारत को अलग-थलग करना हम सबके लिए बड़ा मुसीबत साबित होगा। मैककॉर्मिक ने कहा- पाकिस्तान 30 करोड़ की आबादी वाला देश है, लेकिन आप उसे अमेरिका में निवेश लाते हुए नहीं देखते।
इसके उलट भारत निवेश लेता भी है और अमेरिका में निवेश भी करता है। उन्होंने भारत की प्रतिभा शक्ति पर जोर देते हुए कहा कि भारत केवल कुशल लोगों को ही नहीं भेजता, बल्कि वे अमेरिका में विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं भी निभा रहे हैं।
उन्होंने कहा- टैलेंट मायने रखता है और भारत पूरी दुनिया में जबरदस्त मात्रा में टैलेंट उपलब्ध करा रहा है। यह सिर्फ प्रतिभाशाली लोगों को भेजने तक सीमित नहीं है, बल्कि वे यहां अहम खाली जगहों को भी भर रहे हैं।
ऐसे में अमेरिकी सांसद ने ट्रंप प्रशासन के लिए स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि भारत को अलग-थलग करना अमेरिका के लिए बहुत बड़ी समस्या बन सकता है। उन्होंने कहा- अगर अमेरिका भारत को दोस्त के रूप में अपनाता है, तो शांति और समृद्धि होगी। अगर हमने भारत को अलग किया, तो यह हम सबके लिए बड़ा संकट होगा।
पाकिस्तान पर अमेरिकी निवेश नहीं
कार्यक्रम में मौजूद भारतीय मूल के डेमोक्रेट सांसद एमी बेरा ने भी मैककॉर्मिक की बातों से सहमति जताई। उन्होंने कहा कि अमेरिका और पाकिस्तान के बीच भले ही हाल में नजदीकियां बढ़ी हों, लेकिन अमेरिकी कंपनियां पाकिस्तान में अरबों डॉलर का निवेश नहीं कर रही हैं।
बेरा ने स्पष्ट कहा- अमेरिका पाकिस्तान के साथ कोई रणनीतिक साझेदारी नहीं बना रहा है। अमेरिकी कंपनियां वहां बहु-अरब डॉलर का निवेश नहीं कर रहीं। यह सब भारत में हो रहा है।
टैरिफ और व्यापार पर तनाव
गौरतलब है कि ट्रंप 2.0 के दौरान भारत-अमेरिका संबंधों में खटास आई है। वॉशिंगटन ने रूसी तेल की खरीद को लेकर भारत पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया, जिससे कुल टैरिफ 50 प्रतिशत तक पहुंच गया।
वाइट हाउस का कहना है कि रूसी तेल से मिलने वाला राजस्व यूक्रेन युद्ध में मॉस्को की मदद कर रहा है। इसके अलावा द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर गतिरोध ने भी रिश्तों को जटिल बना दिया है।
रूसी तेल और मोदी का रुख
इस मुद्दे पर मैककॉर्मिक ने कहा कि अमेरिका को यह पसंद नहीं है कि भारत अब भी रूसी तेल खरीद रहा है, लेकिन वह इसके कारणों को समझता है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा करते हुए कहा- प्रधानमंत्री मोदी अच्छे अर्थों में बेहद राष्ट्रवादी हैं। वे अपने देश का हित देख रहे हैं। सस्ता ऊर्जा संसाधन लेकर भारत अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रहा है।
‘विवाह जैसा रिश्ता’
भारत और अमेरिका को समान सोच वाला बताते हुए मैककॉर्मिक ने सहयोग और व्यापार में संतुलन की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा- जो उद्योग हम भारत लाते हैं और भारतीय वस्तुओं का जो उपभोग हम करते हैं, वह अहम है। लेकिन संतुलन जरूरी है- शादीशुदा लोग इसे अच्छी तरह समझते हैं।
कुल मिलाकर, रिपब्लिकन सांसद का संदेश साफ था- भारत को नजरअंदाज करना अमेरिका के लिए रणनीतिक, आर्थिक और कूटनीतिक स्तर पर भारी पड़ सकता है, जबकि पाकिस्तान अभी भी अमेरिकी निवेश और रणनीतिक साझेदारी के लिहाज से पीछे है।
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