वाशिंगटन। डोनाल्ड ट्रंप (Donald trump) ने एक चौंकाने वाला दावा करते हुए कहा है कि उन्होंने ईरान में सत्ता-विरोधी प्रदर्शनों के दौरान प्रदर्शनकारियों को हथियार भेजे थे। उनके मुताबिक ये हथियार कुर्द लड़ाकों के जरिए भेजे गए, लेकिन आशंका है कि वे हथियार प्रदर्शनकारियों तक पहुंचने के बजाय उन्हीं के पास रह गए। ट्रंप ने यह बातें Fox News को दिए एक टेलीफोनिक इंटरव्यू में कही।
कौन हैं कुर्द और क्यों अहम?
ट्रंप के बयान में जिस कुर्द समुदाय का जिक्र हुआ, वह दुनिया के सबसे बड़े बिना स्वतंत्र राष्ट्र वाले जातीय समूहों में से एक है। करीब 3 करोड़ की आबादी वाला यह समुदाय तुर्की, इराक, ईरान और सीरिया में फैला हुआ है। उनकी अपनी भाषाएं और बोलियां हैं तथा अधिकांश कुर्द सुन्नी मुस्लिम माने जाते हैं।
ईरान में करीब 90 लाख कुर्द रहते हैं। तेहरान सरकार कई कुर्द विद्रोही समूहों को आतंकवादी संगठन मानती है। हाल के वर्षों में कुछ कुर्द समूहों ने हथियारबंद गतिविधियों से दूरी बनाई, लेकिन क्षेत्रीय तनाव के बीच ईरान ने इराक स्थित कुर्द ठिकानों पर कई बार हवाई हमले भी किए हैं।
ट्रंप का समर्थन और बाद में नरमी
ईरान के खिलाफ संभावित कुर्द विद्रोह पर ट्रंप ने पहले समर्थन जताया था और कहा था कि अगर कुर्द कार्रवाई करते हैं तो वे उसका समर्थन करेंगे। हालांकि बाद में उन्होंने यह भी कहा कि वे नहीं चाहते कि कुर्द ईरान के खिलाफ आक्रामक अभियान शुरू करें।
मौतों को लेकर भी दावा
ट्रंप ने यह भी कहा कि सत्ताविरोधी आंदोलन के दौरान ईरान सरकार ने 45 हजार लोगों को मार डाला। हालांकि प्रदर्शनों में मारे गए लोगों की संख्या को लेकर अलग-अलग दावे सामने आते रहे हैं—कुछ कार्यकर्ता करीब 7 हजार और कुछ 30 हजार मौतों की बात करते हैं।
ट्रंप के इस बयान से पश्चिम एशिया की राजनीति में नई बहस छिड़ सकती है, क्योंकि यह दावा संवेदनशील क्षेत्रीय समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।
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