
वाशिंगटन। अमेरिका और ईरान (America and Iran) के बीच चल रहा तनाव अब एक नए और खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी खुफिया विभाग की चेतावनी के बाद, अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपने कई दूतावासों में स्टाफ की संख्या घटा दी है। राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने भी चेतावनी दी है कि अगर ईरान नहीं माना, तो अमेरिका फिर से सैन्य कार्रवाई कर सकता है। बता दें कि अमेरिका एक्शन में इसलिए आया है, क्योंकि खुफिया जानकारी सामने आई है कि ईरान ने विदेशों में अमेरिकी नागरिकों और सैन्य कर्मियों को निशाना बनाने की अपनी साजिशों को तेज कर दिया है।
मेमो लिखकर रुबियो को दी चेतावनी
राष्ट्रीय खुफिया निदेशक (DNI) जे क्लेटन ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो को एक मेमो लिखकर चेतावनी दी है। मेमो में बताया है कि ईरान की तरफ से अमेरिकी नागरिकों को खत्म करने की साजिशें मध्य पूर्व और अन्य देशों में तेज हो चुकी हैं। इस खुफिया रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान ने अमेरिकी कर्मियों को निशाना बनाने के अपने प्रयासों को काफी बढ़ा दिया है। इस मेमो की एक कॉपी सीआईए निदेशक जॉन रैटक्लिफ को भी भेजी गई है।
अब समझिए किन-किन देशों में हुआ असर?
गौर करने वाली बात यह है कि बढ़ते सुरक्षा खतरों के बीच अमेरिका ने मध्य पूर्व के अपने 4 प्रमुख दूतावासों में कर्मचारियों की संख्या कम कर दी है। जॉर्डन, लेबनान, कतर और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में स्थित अमेरिकी मिशनों में स्टाफ घटाया गया है। हालांकि, ये दूतावास अभी भी पाबंदियों के साथ खुले रहेंगे। इससे पहले यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के हमलों के चलते सऊदी अरब से गैर-जरूरी कर्मचारियों और उनके परिवारों को पहले ही देश छोड़ने का आदेश दिया जा चुका है।
हूती विद्रोहियों का आतंक और समुद्री मार्ग पर संकट
अमेरिका ने इन सुरक्षा उपायों के पीछे यमन के हूती विद्रोहियों के हमलों को भी मुख्य वजह बताया है। हूती विद्रोही लगातार सऊदी अरब के ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले कर रहे हैं। इसके अलावा, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी जहाजों की मदद करने पर अमेरिकी सैन्य अड्डों को तबाह करने की धमकी दी है। तेल टैंकरों पर लगातार हो रहे हमलों से पूरे इलाके में ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक व्यापार पर खतरा मंडरा रहा है।
ट्रंप की दो टूक- या तो समझौता करो, या हमले के लिए तैयार रहो
गौरतलब है कि एक तरफ जहां दूतावासों से स्टाफ हटाया जा रहा है, वहीं कूटनीतिक स्तर पर बातचीत की उम्मीदें धुंधली पड़ रही हैं। फ्लोरिडा में एक रैली के दौरान राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने साफ कर दिया कि उन्होंने सैन्य कार्रवाई का विकल्प खुला रखा है। ट्रंप ने कहा कि या तो ईरान समझौता करे, या हम एक और ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ जैसा अभियान चला सकते हैं। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों ने इन स्टाफ कटौतियों को किसी नए संभावित अमेरिकी या इजरायली हमले की तैयारी से इनकार किया है और इसे पूरी तरह से सुरक्षा चिंताओं का नतीजा बताया है।
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