वॉशिंगटन/नई दिल्ली। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) के पास एक टैंकर पर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई (U.S. Military Action) में तीन भारतीय नाविकों की मौत के बाद विवाद गहराता जा रहा है। भारत की ओर से कड़ा विरोध दर्ज कराने के बीच अब अमेरिका ने इस मामले में सफाई देते हुए दावा किया है कि जहाज पर कार्रवाई से पहले कई बार चेतावनी दी गई थी, लेकिन उसका पालन नहीं किया गया।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि पलाऊ के झंडे वाले कथित “शैडो फ्लीट” टैंकर को निशाना बनाने से पहले 60 से अधिक मौखिक चेतावनियां जारी की गई थीं। अमेरिकी पक्ष का दावा है कि जहाज को रोकने और दिशा बदलने के लिए लगातार संदेश भेजे गए, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।
बताया गया कि जहाज पर कुल 24 भारतीय क्रू सदस्य मौजूद थे। इनमें से 21 को सुरक्षित बचा लिया गया, जबकि इंजन रूम में आग लगने से तीन भारतीय नाविकों — आदित्य शर्मा, शिवानंद चौरसिया और पटनाला सुरेश — की मौत हो गई।
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, कार्रवाई से पहले चेतावनी फायरिंग की गई थी और हमला करने से लगभग 15 मिनट पहले क्रू को इंजन रूम खाली करने का अलर्ट भी दिया गया था। इसके बाद जहाज नहीं रुकने पर इंजन सेक्शन को निशाना बनाया गया।
अमेरिका का कहना है कि संबंधित टैंकर ईरान की कथित “शैडो फ्लीट” का हिस्सा था, जिसका इस्तेमाल प्रतिबंधों से बचते हुए तेल परिवहन के लिए किया जा रहा था। अमेरिकी सैन्य कमान का दावा है कि क्षेत्र में लागू नाकेबंदी के नियमों को लेकर पहले से सख्ती बरती जा रही थी।
घटना के बाद भारत सरकार ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio से बातचीत कर घटना पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि वाणिज्यिक जहाजों के खिलाफ ऐसी घातक कार्रवाई उचित नहीं मानी जा सकती।
इसके अलावा भारत ने अमेरिकी राजदूत को तलब कर औपचारिक विरोध (डिमार्श) भी दर्ज कराया।
इस मुद्दे पर कांग्रेस नेता Rahul Gandhi ने भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए प्रधानमंत्री Narendra Modi की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए घटना पर सरकार की प्रतिक्रिया को लेकर आलोचना की।
फिलहाल, यह मामला भारत-अमेरिका संबंधों और खाड़ी क्षेत्र में भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर नई बहस का विषय बन गया है।
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