
येरुशलम। अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध समाप्त करने के लिए हुए समझौते (America-Iran peace agreements) का पश्चिम एशिया (West Asia) में मिला-जुला असर देखने को मिल रहा है। जहां लेबनान में लोगों ने इस समझौते का स्वागत किया है। वहीं, उत्तरी इजरायल के कई समुदायों में इसे लेकर निराशा और चिंता का माहौल है। दूसरी ओर, ईरान में लोगों के बीच राहत और उम्मीद की भावना दिखाई दे रही है। उत्तरी इजरायल के सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों का मानना है कि यह समझौता उन्हें लेबनान स्थित हिजबुल्लाह से मिलने वाले सुरक्षा खतरों से पर्याप्त सुरक्षा नहीं देता है।
इजरायली अखबार ‘इजरायल हयोम’ के अनुसार मोशाव मार्गालियोट समुदाय परिषद के अध्यक्ष एतान डेविडी ने कहा कि हम पर थोपा गया यह दुर्भाग्यपूर्ण युद्धविराम उत्तर के निवासियों को हिजबुल्लाह के लगातार खतरे के बीच छोड़ देता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के लिए बेहतर होता कि वे हालिया संघर्ष में शामिल ही नहीं होते और स्थिति को पहले जैसा रहने देते। डेविडी ने कहा कि यह समझौता हमें अनिश्चितता की स्थिति में ले जाता है, क्योंकि सुरक्षा बहाल नहीं हुई है। इसके उलट यहां सुरक्षा की स्थिति और खराब हो गई है। राष्ट्रपति ट्रंप जिस दुर्भाग्यपूर्ण समझौते को आगे बढ़ा रहे हैं और जिसे प्रधानमंत्री की सहमति व चुप्पी मिली हुई है, उसने चिंता बढ़ा दी है। उधर, लेबनान में इस समझौते को संभावित राहत के रूप में देखा जा रहा है। लंबे समय से संघर्ष और अस्थिरता का सामना कर रहे लोगों को उम्मीद है कि इससे सीमा क्षेत्रों में हिंसा कम होगी और सामान्य जीवन बहाल हो सकेगा।
ईरान में सकारात्मक प्रतिक्रिया
ईरान में भी समझौते को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिली है। कई लोगों को उम्मीद है कि इससे युद्ध का अंत होगा, आर्थिक दबाव कम होंगे और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों में संभावित ढील का रास्ता खुल सकता है। हालांकि समझौते की पूरी शर्तें अभी सार्वजनिक नहीं की गई हैं, लेकिन क्षेत्र में सामने आ रही प्रतिक्रियाएं यह संकेत देती हैं कि इस समझौते को लेकर विभिन्न देशों और समुदायों की अपेक्षाएं और चिंताएं अलग-अलग हैं।
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