
डेस्क। इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच 40 दिनों तक चली जंग के दौरान ईरानी सेना ने मिडिल-ईस्ट में अमेरिकी ठिकानों पर हाहाकारी तबाही मचाई थी। इसका खुलासा खुद कुवैत में तैनात एक अमेरिकी सैनिक ने किया है। कुवैत में अमेरिकी ठिकानों पर ईरानी हमलों के बारे में एक अमेरिकी सैनिक ने बेहद डरावनी ईरानी स्ट्राइक का ब्यौरा दिया है।
अमेरिकी सैनिक ने बताया कि कुवैत में अमेरिकी ठिकानों पर जब ईरान ने हमला किया तो इससे “सब कुछ हिल गया, बिल्कुल वैसा ही जैसा फिल्मों में दिखाते हैं। कान बजने लगे… चारों तरफ धूल, धुआं ही धुआं था। हम बिना किसी ठोस कारण के अंदरूनी और असुरक्षित इलाकों में चले गए। ड्रोन हमले से बचाव का कोई इंतजाम नहीं था। बिल्कुल नहीं।
एक अमेरिकी सैनिक ने खुलासा किया है कि ईरानी हमलों के दौरान कुवैत में ड्रोन से बचने का कोई उपाय नहीं था। लिहाजा उसे असुरक्षित इलाकों में भागना पड़ा। यह घटना ईरान और अमेरिका-इजराइय युद्ध के दौरान कुवैत स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों पर ईरानी ड्रोन हमलों की श्रृंखला का हिस्सा है। ईरानी सेना ने कुवैत में अमेरिकी ठिकानों, खासकर अली अल-सेलेम एयर बेस और अन्य कमांड पोस्ट पर कई बार ड्रोन और मिसाइल हमले किए थे। इन हमलों में कई अमेरिकी सैनिक मारे गए और दर्जनों घायल हुए। अमेरिकी सैनिकों के अनुसार उनकी यूनिट को पहले से ही ईरानी हमले का खतरा पता था, फिर भी उन्हें असुरक्षित जगह पर तैनात किया गया।
अमेरिकी सैनिक ने ट्रंप की सैन्य तायारियों का बैंड बजा दिया है। सैनिक ने बताया कि पेंटागन की ओर से ईरानके “एक ड्रोन बच निकलने” का दावा गलत था। सैनिक ने कहा कि उनकी यूनिट बिल्कुल भी तैयार नहीं थी और कोई मजबूत सुरक्षा दीवार या एंटी-ड्रोन सिस्टम नहीं था। हमले के तुरंत बाद सैनिकों ने एक-दूसरे के घावों का इलाज किया और घायलों को निकालने की कोशिश की। धूल-धुएं और विस्फोट की आवाज के बीच पूरा इलाका फिल्मी दृश्य जैसा लग रहा था।
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