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MP में अवैध शराब बनाने में Methanol का इस्तेमाल

September 27, 2021

  • सरकार ने कलेक्टरों को दिया सर्च वारंट जारी करने का पावर
  • एएसआई व नायब तहसीलदार स्टॉक देख सकेंगे

भोपाल। मुरैना, उज्जैन और मंदसौर (Morena, Ujjain and Mandsaur) में शराब के सेवन से मृत्यु के जो मामले सामने आए थे, उसमें मेथानोल (Methyl Alcohol) का उपयोग किया गया था। मेथानोल सहित अन्य रसायन के उपयोग से शराब विषैली हो गई थी। इस तहत की घटनाएं आगे न हों, इसके लिए गृह विभाग ने सभी कलेक्टर और पुलिस अधीक्षकों (Collectors and Superintendents of Police) को मध्य प्रदेश विष अधिनियम के प्रविधानों का सख्ती से पालन कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही सरकार ने कलेक्टरों को ड्रग स्टॉकिस्टों (Drug Stockists) की जांच के लिए सर्च वारंट जारी करने के अधिकार दिए हैं। इस संबंध में गृह विभाग ने सभी कलेक्टरों को रविवार को निर्देश जारी किए हैं। इसमें कहा गया है कि ड्रग स्टॉक की जांच अब पुलिस के ASI (सहायक पुलिस निरीक्षक) और नायब तहसीलदार चेक कर सकेंगे। अभी तक यह अधिकारी DSP और SDM  तक के अधिकारियों के पास थे। गृह विभाग के सूत्रों ने बताया कि इसी साल जनवरी में मुरैना में जिस जहरीली शराब को पीने से 26 लोगों की मौत हुई थी, उसकी फोरेंसिक जांच में पता चला कि शराब में मेथेनॉल (Methyl Alcohol) मिलाया गया था। मृतकों के शवों की विसरा रिपोर्ट से भी यह बात सामने आई थी कि शराब में जहरीला तत्व मिला था।


  • दरअसल, माफिया ने शराब को सस्ते दाम पर बेचने के लालच में इथाइल की जगह मिथाइल केमिकल (थिनर) से नकली शराब बनाई थी। पुलिस जांच में यह पता चला था कि आगरा की कॉस्मेटिक फैक्ट्री से यह केमिकल कॉस्मेटिक बनाने के नाम पर खरीदा गया। इससे बनी जहरीली शराब ने 13 गांव में 26 लोगों की जान ले ली थी। सरकार ने मुरैना कांड की जांच के लिए गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा की अध्यक्षता में एसआईटी बनाई थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि प्रदेश में विगत दिनों अवैध शराब बनाने में औद्योगिक और अन्य प्रयोजनों में इस्तेमाल होने वाले मेथेनॉल तथा अन्य विषैले रसायन आदि के उपयोग से ही लोगों की मौत हुई। एसआईटी की रिपोर्ट के मुताबिक, मुरैना के अलावा उज्जैन और मंदसौर में जहरीली शराब में मेथेनॉल की मात्रा पाई गई थी।
    ऐसी घटनाओं भविष्य में न हों, इसके लिए राज्य सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं। गृह विभाग ने विष अधिनियम 1999 (केंद्रीय कानून) तथा उसके तहत मध्यप्रदेश सरकार द्वारा अधिसूचित विष नियम 2014 का सख़्ती से पालन कराने के निर्देश समस्त कलेक्टर्स और एसपी को जारी किए गए हैं। नियमों में अधिसूचित समस्त प्रकार के विष पदार्थों के विक्रय के लिए कलेक्टर से लाइसेंस प्राप्त किया जाना जरूरी है। इसकी शर्तों में कहा गया है कि विक्रय स्थल, विषैले पदार्थ के स्टोर की अधिकतम मात्रा, सुरक्षा उपाय व इसे किसे बेचा जाएगा, इसका पूरा रिकार्ड स्टॉकिस्ट को रखना होगा। गृह विभाग के निर्देश में कहा गया है कि कलेक्टर ऐसे परिसरों की जांच के लिए सर्च वॉरंट जारी कर सकेंगे, जबकि एएसआई या नायब तहसीलदार स्तर के अधिकारी स्टॉक चेक करने का अधिकार होगा। वे इन विषैले पदार्थों के विक्रय पंजी चेक कर सकेंगे। बता दें कि इन नियमों का उल्लंघन 1 साल की सजा का प्रावधान है।

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