
छिंदवाड़ा: मध्य प्रदेश के पेंच टाइगर रिजर्व (Pench Tiger Reserve) के छिंदवाड़ा वन क्षेत्र (Chhindwara Forest Area) अंतर्गत आने वाले गुमतरा कोर परिक्षेत्र में एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्थाओं की पोल खुल गई है. यहां प्रतिबंधित ‘क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट’ क्षेत्र में मछली (Fish) पकड़ने गए 43 वर्षीय ग्रामीण कमल उईके (Kamal Uike) पर बाघ (Tiger) ने हमला कर उसे मौत के घाट उतार दिया. इस घटना ने जहां क्षेत्र में दहशत फैला दी है, वहीं पेंच पार्क प्रबंधन की गश्त और सुरक्षा निगरानी पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
मृतक कमल उईके, पिता रावजी उईके, निवासी ग्राम टिकारी माल (थाना कुरई), बीते 4 जनवरी की शाम से लापता थे. परिजनों ने 5 जनवरी को ही प्रबंधन को सूचना दे दी थी कि कमल अक्सर पेंच नदी के किनारे महादेव घाट की तरफ मछली पकड़ने जाते थे. 6 जनवरी की सुबह चांद थाना पुलिस और वन विभाग को तलाशी के दौरान महादेव घाट के पास कमल का क्षत-विक्षत शव मिला. शव की स्थिति देखकर स्पष्ट था कि बाघ ने उसे अपना शिकार बनाया है. पार्क प्रबंधन का कहना है कि युवक नाव (बोट) के जरिए नदी पार कर प्रतिबंधित क्षेत्र में दाखिल हुआ था.
इस दर्दनाक हादसे के बाद पार्क प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर उंगलियां उठ रही हैं. पेंच टाइगर रिजर्व का कोर एरिया सबसे संवेदनशील माना जाता है, जहां परिंदा भी पर नहीं मार सकता. ऐसे में एक ग्रामीण नाव लेकर नदी के रास्ते महादेव घाट तक पहुंच गया और घंटों वहां मौजूद रहा, लेकिन विभाग की गश्ती टीम को इसकी भनक तक नहीं लगी. सवाल यह उठता है कि यदि यह क्षेत्र ‘क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट’ है, तो यहां अवैध प्रवेश को रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम क्यों नहीं थे? क्या पार्क की सुरक्षा केवल कागजों तक सीमित है?
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