
नई दिल्ली । राज्यसभा सांसद जया बच्चन (Rajya Sabha MP Jaya Bachchan) ने कहा कि वीआईपी संस्कृति समाज के लिए एक गंभीर खतरा है (VIP Culture is a serious Threat to the Society) ।
राज्यसभा में बोलते हुए सांसद ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में बढ़ती वीआईपी संस्कृति की इस प्रवृत्ति पर वह कड़ी आपत्ति जता रही हैं। उन्होंने कहा कि यह वीआईपी संस्कृति विशेष रूप से दिल्ली जैसे महानगर में आम नागरिकों के जीवन को बाधित कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब भी किसी वीआईपी का आवागमन होता है, चाहे वह राजनेता हो, उच्च अधिकारी हो या कोई अन्य गणमान्य व्यक्ति, तो सड़कों पर अन्य लोगों को रोक दिया जाता है। ट्रैफिक डायवर्जन किए जाते हैं और आम लोगों को लंबे समय तक अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए इंतजार करना पड़ता है।
जया बच्चन ने अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए बताया कि हाल ही में संसद से बाहर निकलते समय मुख्य द्वार को वीआईपी मूवमेंट के कारण बंद कर दिया गया था, जिससे उन्हें और अन्य सांसदों को भी रोका गया। उन्होंने इसे अपने 22 वर्षों के संसदीय जीवन का सबसे अपमानजनक अनुभव बताया। उनका कहना था कि जनप्रतिनिधि होने के बावजूद इस प्रकार का व्यवहार अस्वीकार्य है, क्योंकि वे (सांसद) किसी भी वीआईपी के लिए खतरा नहीं हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली में कई ऐसे इलाके हैं जहां बड़े राजनीतिक नेता रहते हैं और वहां अक्सर सड़कें बंद कर दी जाती हैं, जिससे संसद पहुंचना भी मुश्किल हो जाता है। उन्होंने कहा कि वीआईपी मूवमेंट के कारण कई बार सांसदों को आधे-आधे घंटे तक इंतजार करना पड़ता है और उन्हें अपनी यात्रा का समय पहले से तय करना पड़ता है ताकि वे समय पर सदन में पहुंच सकें।
एक उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि रिटायर्ड हो रहे राज्यसभा सांसदों के लिए सभापति सीपी राधाकृष्णन के यहां विदाई समारोह (फेयरवेल पार्टी) आयोजित की गई थी। इसमें शामिल होने के लिए उन्हें एक घंटे तक ट्रैफिक में फंसे रहना पड़ा, जिसका कारण भी वीआईपी मूवमेंट था। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में आम जनता में भारी नाराजगी देखी जाती है। सांसद ने विशेष रूप से चिंता जताई कि इस वीआईपी संस्कृति के कारण एम्बुलेंस जैसी आपातकालीन सेवाएं भी प्रभावित होती हैं।
उन्होंने कहा कि कई बार एम्बुलेंस को भी रोक दिया जाता है, जो मानव जीवन के लिए बेहद खतरनाक है। यदि समय पर इलाज न मिले तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय तुलना करते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने दुनिया के कई देशों की यात्रा की है, जहां वीआईपी मूवमेंट होता है, लेकिन वहां आम जनता को इस तरह नहीं रोका जाता। भारत में यह समस्या ज्यादा गंभीर है और इसे तत्काल सुधारने की आवश्यकता है।
अपने संबोधन के अंत में उन्होंने सभापति, जो देश के उपराष्ट्रपति भी हैं, से आग्रह किया कि वे सरकार के साथ इस मुद्दे पर चर्चा करें और ठोस कदम उठाएं। उन्होंने कहा कि इस वीआईपी संस्कृति को खत्म करना जरूरी है, ताकि आम करदाता नागरिकों को सम्मान मिल सके और लोकतंत्र की मूल भावना बनी रहे। उन्होंने कहा कि यदि इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो भविष्य में रोड रेज जैसी स्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं, जो देश के लिए ठीक नहीं होंगी।
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