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‘संशोधित फॉर्म-6 को हमने मंजूरी नहीं दी’: सीजेआई सूर्यकांत की दो टूक, चुनाव आयोग और केंद्र को जारी किया नोटिस

October 05, 2026

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को स्पष्ट किया कि उसने निर्वाचन आयोग के नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म 6 के किसी संशोधित प्रारूप को मंजूरी नहीं दी है। अदालत की यह टिप्पणी 2025 में फॉर्म में जोड़े गए एक अतिरिक्त घोषणा पत्र को लेकर चल रहे विवाद के बीच आई।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि अदालत रिकॉर्ड की जांच करना चाहती है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि फॉर्म 6 में बदलाव किसने किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “संशोधित फॉर्म 6 को हमने मंजूरी नहीं दी है, यह बिल्कुल स्पष्ट है।” मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि जब रिकॉर्ड अदालत के सामने आएगा तो वह देखना चाहती है कि फॉर्म 6 में बदलाव किसने किया। दरअसल, 28 सितंबर को निर्वाचन आयोग ने इस विवाद पर जारी बयान में कहा था कि फॉर्म 6 के साथ जोड़ी गई घोषणा को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा था।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने का अंतरिम आदेश जारी करने से इनकार कर दिया। उन पर आरोप है कि उन्होंने दो अन्य निर्वाचन आयुक्तों की सहमति के बिना एकतरफा फैसले लिए। पीठ ने कहा कि जब तक निर्वाचन आयोग की ओर से जवाब नहीं मिलता, तब तक वह यह मानकर चलेगी कि आयोग के फैसले कानून के अनुरूप लिए गए हैं। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा, “रिपोर्ट सही हो सकती है या गलत, लेकिन हम उसके आधार पर आदेश पारित नहीं कर सकते। हमें उनके जवाब का इंतजार करना होगा।”


  • विवाद का केंद्र ऑनलाइन मतदाता पंजीकरण प्रक्रिया में जोड़ी गई एक अतिरिक्त घोषणा है। इसके तहत विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान नए मतदाताओं से खुद को या अपने माता-पिता अथवा दादा-दादी को पिछली मतदाता सूची से जोड़ने वाली जानकारी देने को कहा गया था। रिपोर्ट के अनुसार, निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने इस अतिरिक्त आवश्यकता पर आपत्ति जताई थी। रिपोर्ट में उनके हवाले से कहा गया कि फॉर्म 6, निर्वाचक पंजीकरण नियम, 1960 के तहत निर्धारित वैधानिक फॉर्म है। ऐसे में नियमों में औपचारिक संशोधन किए बिना इसमें प्रभावी बदलाव नहीं किया जा सकता।

    इस विवाद की शुरुआत निर्वाचन आयोग के जून 2025 के एसआईआर आदेश से हुई थी। इसमें नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए फॉर्म 6 के साथ अनुबंध डी नाम से एक अतिरिक्त घोषणा का प्रावधान किया गया था। हालांकि, जिस आवश्यकता पर अब सवाल उठ रहे हैं, वह बाद में ऑनलाइन फॉर्म 6 प्रक्रिया में दिखाई दी। जुलाई 2026 में शुरू की गई इस व्यवस्था के तहत आवेदकों से खुद को या अपने माता-पिता अथवा दादा-दादी को पिछली SIR मतदाता सूचियों से जोड़ने की जानकारी मांगी गई थी। इस व्यवस्था का समय भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि ऑनलाइन आवश्यकता सुप्रीम कोर्ट के 27 मई के बिहार एसआईआर संबंधी फैसले के कुछ सप्ताह बाद शुरू की गई थी।

    निर्वाचन आयोग का कहना है कि फॉर्म 6 में कोई बदलाव नहीं किया गया था और एसआईआर की घोषणा एक अतिरिक्त आवश्यकता थी। 28 सितंबर के अपने बयान में आयोग ने कहा था कि इस घोषणा को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा था। आयोग ने यह भी कहा था कि निर्वाचक पंजीकरण नियम, 1960 के तहत निर्धारित फॉर्म SIR से इतर अवधि में लागू रहेंगे। जिन राज्यों में एसआईआर की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, वहां आयोग ने फॉर्म 6 से एसआईआर से जुड़ी अतिरिक्त घोषणा को हटा दिया है।

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