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वरुण गांधी के सब्र का कौन – सा बड़ा इनाम देने जा रही भाजपा?

March 18, 2026


नई दिल्ली। 2024 के लोकसभा चुनाव में टिकट नहीं मिलने के बाद अफवाहें खूब उड़ीं. निर्दलीय लड़ने की खबरें आईं लेकिन वरुण गांधी ने पार्टी के खिलाफ या फैसले पर एक शब्द नहीं बोला. न कोई बयान, न किसी तरह का बगावती तेवर. शायद अब उन्हें अपने सियासी सब्र का फल मिलने वाला है. हां, जबसे वरुण गांधी ने पीएम नरेंद्र मोदी से परिवार के साथ मुलाकात की है, कई तरह की चर्चा है. उन्होंने ट्वीट किया- आपके आभामंडल में अद्भुत पितृवत स्नेह और संरक्षण का भाव है. आपसे हुई भेंट इस विश्वास को और भी दृढ़ बना देती है कि आप देश और देशवासियों के सच्चे अभिभावक हैं. क्या यूपी विधानसभा चुनाव से एक साल पहले ही वरुण गांधी को बड़ी जिम्मेदारी मिलने वाली है?


  • हां, फिलहाल वरुण को टिकट क्यों नहीं मिला था, वो बात पुरानी बात हो चुकी है. वह पार्टी से नाराज थे या पार्टी उनसे? आज की चर्चा यह है कि इस समय पीएम मोदी के साथ परिवार समेत मिलने के बाद क्या बदलने वाला है? आपको याद होगा वरुण की मां और पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी सुल्तानपुर सीट से पिछला लोकसभा चुनाव हार गई थीं. तब से वरुण और मेनका कम चर्चा में थे. अचानक इस समय वरुण की मुलाकात और मुस्कुराती तस्वीर के पीछे की कहानी क्या है? माना जा रहा है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में वरुण या उनकी पत्नी यामिनी गांधी या दोनों को चुनाव प्रचार में उतारा जा सकता है.

    – कम लोगों को याद होगा कि वरुण की पत्नी यामिनी रॉय चौधरी बंगाली परिवार से आती हैं. दोनों के परिवारों में पुरानी दोस्ती रही है.
    – यामिनी एक कवयित्री भी हैं. उनके परदादा चितरंजन दास और वरुण के परदादा पंडित जवाहरलाल नेहरू अच्छे दोस्त थे.
    – देशबंधु चितरंजन दास वकील और स्वतंत्रता संग्राम के बड़े लीडर थे. उनका परिवार तब ढाका में रहा करता था. दास ही नेताजी सुभाष चंद्र बोस के राजनीतिक गुरु थे. ये समीकरण बंगाल से भाजपा को सीधे कनेक्ट कर सकता है.
    – ऐसे में उस पारिवारिक विरासत को बंगाल चुनाव के समय सामने लाया जा सकता है. वैसे अभी यामिनी लाइमलाइट से दूर रहती हैं और राजनीति में सक्रिय नहीं हैं.
    – बड़ी संभावना यह है कि वरुण गांधी को बंगाल चुनाव में प्रचार के लिए उतारा जा सकता है. वह बंगाल के प्रभारी भी रहे हैं. आगे भाजपा की तैयारी यूपी चुनाव की भी होगी.

    वरुण गांधी भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव रहे हैं. वह पश्चिम बंगाल के प्रभारी रह चुके हैं. तब उन्होंने तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष राहुल सिन्हा के साथ मिलकर पार्टी को मजबूत करने पर काम किया था. हाल ही में राहुल राज्यसभा पहुंच गए. वरुण लगातार तीन बार पीलीभीत, सुल्तानपुर, फिर पीलीभीत से सांसद बने. हालांकि पिछले चुनाव में भाजपा ने उनका टिकट काटकर जितिन प्रसाद को दे दिया. वह जीते और मंत्री भी बन गए.

    चर्चा थी कि वरुण ने पर्चा खरीद लिया था और वह निर्दलीय उतरने वाले थे, शायद उन्होंने अपने कदम पीछे खींच लिए. इसके बाद राजनीतिक रूप से कम सक्रिय रहे. सोशल मीडिया पर भी कम पोस्ट आते. अब शायद इस खामोशी का इनाम मिल सकता है.

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