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CJI के सामने व्हाट्सएप का यू टर्न NCLT के आदेश मानने को तैयार मेटा..

February 24, 2026


नई दिल्ली।देश की शीर्ष अदालत (Supreme Court of India) में डेटा गोपनीयता और प्रतिस्पर्धा कानून (Competition Law) से जुड़े अहम मामले में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनी (Meta Platforms) और उसके मैसेजिंग प्लेटफॉर्म (WhatsApp) ने सोमवार को मुख्य न्यायाधीश Surya Kant (Chief Justice Surya Kant) की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष कहा कि वे अपीलीय न्यायाधिकरण के निर्देशों का पालन करेंगे और इसके खिलाफ दायर अपनी अर्जी वापस ले रहे हैं।

पीठ में जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली भी शामिल थे। अदालत दिसंबर 2025 में आए National Company Law Appellate Tribunal के आदेश के खिलाफ दायर अपीलों पर सुनवाई कर रही थी। यह आदेश भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग द्वारा तय गोपनीयता और सहमति संबंधी मानकों को विज्ञापन से जुड़े डेटा पर भी लागू करने से जुड़ा था।

मामले की जड़ में उपयोगकर्ताओं के डेटा को विज्ञापन उद्देश्यों के लिए साझा करने का मुद्दा है। Competition Commission of India ने व्हाट्सएप की गोपनीयता नीति को लेकर 213.14 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था और डेटा साझा करने के तौर तरीकों पर कड़े निर्देश दिए थे। बाद में अपीलीय मंच ने कुछ राहत दी लेकिन जुर्माने को बरकरार रखा।

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता Kapil Sibal ने व्हाट्सएप की ओर से अदालत को बताया कि कंपनियां 16 मार्च तक न्यायाधिकरण के निर्देशों को लागू कर देंगी। मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि स्थगन की मांग वाली याचिकाएं उस हिस्से पर रोक चाहती थीं जिसमें सीसीआई के निर्देशों के अनुपालन को कहा गया था। कंपनियों के रुख में बदलाव के बाद पीठ ने स्थगन याचिकाएं खारिज कर दीं और अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने को कहा। हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि मुख्य अपील में उठाए गए कानूनी मुद्दों पर इस कदम का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

इससे पहले शीर्ष अदालत ने डेटा साझा करने के मसले पर कड़ी टिप्पणी की थी और कहा था कि नागरिकों के निजता के अधिकार से डेटा शेयरिंग के नाम पर खिलवाड़ नहीं किया जा सकता। अदालत की यह टिप्पणी डिजिटल प्लेटफॉर्म और उपभोक्ता अधिकारों के संतुलन पर महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

नवंबर 2025 में अपीलीय मंच ने सीसीआई के उस आदेश के हिस्से को निरस्त कर दिया था जिसमें व्हाट्सएप को पांच वर्ष तक मेटा के साथ विज्ञापन के लिए डेटा साझा करने से रोका गया था। हालांकि 213 करोड़ रुपये का जुर्माना बरकरार रखा गया था जिससे कंपनियों को बड़ा झटका लगा था।


  • अब व्हाट्सएप द्वारा अर्जी वापस लेने और निर्देशों का पालन करने की बात कहे जाने से यह संकेत मिला है कि कंपनी फिलहाल टकराव की राह से हटकर अनुपालन की दिशा में बढ़ना चाहती है। डिजिटल डेटा गोपनीयता और प्रतिस्पर्धा कानून के इस अहम मामले पर देशभर की नजर बनी हुई है क्योंकि इसका असर करोड़ों उपयोगकर्ताओं और टेक कंपनियों की नीतियों पर पड़ सकता है।

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