
नई दिल्ली :अनुराग कश्यप(Anurag Kashyap) ऑफ-बीट बोल्ड कहानियां पर्दे पर दिखाने के लिए जाने जाते हैं। इसी वजह से उन्हें कई बार समस्या भी झेलनी पड़ती है। सेंसर बोर्ड (Censor Board)में भी उनकी फिल्मों को मुसीबतें झेलनी पड़ती हैं। आज हम आपको अनुराग कश्यप की एक ऐसी फिल्म के बारे में बता रहे हैं जो उन्होंने तब बनाई जब वो जीवन के उस पड़ाव थे जब उन्हें हर चीज को लेकर गुस्सा(anger) था। इस फिल्म को बनने में 8 साल(8year) लग गए। फिल्म बॉक्स ऑफिस (box office)पर फ्लॉप हो गई थी, लेकिन ये फिल्म अब ये कल्ट फिल्म बन चुकी है।
2001 में शुरू हुई थी गुलाल की कहानी
अगर आप इस फिल्म को पहचान नहीं पाए हैं तो हम आपको बताते हैं। इस फिल्म का नाम है गुलाल जो फिल्म स्टूडेंट पॉलिटिक्स के पीछे छिपी बड़ी साजिश और मकसद को दिखाती है। अनुराग कश्यप ने इस फिल्म को साल 2001 में बनाने का फैसला किया था, लेकिन फिल्म रिलीज हुई साल 2009 में।
क्यों गुस्से में थे अनुराग कश्यप?
ये फिल्म अनुराग कश्यप के गुस्से से निकली फिल्म है। कुछ सालों पहले अनुराग कश्यप ने अपनी फिल्म गुलाल को लेकर एक पोस्ट लिखा था। उन्होंने इस पोस्ट में लिखा था, “साल 2001 था और सेंसर बोर्ड ने मेरी फिल्म पांच को सर्टिफिकेट देने से मना कर दिया था। मैं बहुत गुस्से में था और बहुत कुछ कहना चाहता था। नवंबर 9, 2000 में उत्तरांचल अब उत्तराखंड नाम से एक राज्य बना और छह दिन बाद 15 नवंबर को झारखंड बना। भारत का 27वां और 28वां स्टेट। मैं हर चीज पर नाराज था, कि क्यों नए राज्य बन रहे हैं, क्यों मैं अपनी फिल्म नहीं रिलीज कर सकता है, क्यों लोग प्यार में पड़ रहे हैं।”
अनुराग कश्यप को मिली गुलाल की कहानी
उस वक्त पांच के एक्टर पंकज सारस्वत ने उनकी मुलाकात एक पार्ट टाइम मॉडल से कराई। उनका नाम था राजा चौधरी। मैंने कभी उन्हें गंभीरता से नहीं लिया। उन्होंने कॉलेज पॉलिटिक्स पर एक कहानी लिखी थी, जो कि एक अच्छी स्टोरी थी, उससे ज्यादा कुछ नहीं। अनुराग ने राजा को भी यही बताया। अनुराग ने राजा को ये कहा कि इस कहानी को एक पृष्ठभूमि की जरूरत है जैसे कि ये घटना कहां घट रही है, इसके पीछे क्या कारण है? राजा को समझ नहीं आया कि वो इसका क्या जवाब दें। तब अनुराग ने उनसे पूछा कि वो कहां से हैं? राजा ने कहा जयपुर। इसके बाद अनुराग राजा के साथ जयपुर गए।
अनुराग कश्यप ने राजपरिवार के सदस्यों से की मुलाकात
जयपुर में अनुराग कश्यप की मुलाकात कई राजपरिवार के सदस्यों से हुई और अनुराग ने उनकी कहानियां सुनीं। उन सब परिवारों में इतिहास को लेकर अपनी-अपनी राय थी, लेकिन साथ ही सरकार से उनकी कुछ शिकायतें भी थीं। ये शिकायतें इतिहास पर आधारित थीं। फिर यही मुद्दा अनुराग की फिल्म की पृष्ठभूमि बनी।
फिर अनुराग कश्यप ने की फिल्म के लिए रिसर्च
पृष्ठभूमि मिलने के बाद अनुराग ने कहानी लिखनी शुरू की। कहानी की रिसर्च की जिसमें उनकी मदद ब्लैक फ्राइडे में अनुराग की असिस्टेंट रहीं अपर्णा मल्होत्रा ने की। अनुराग ने शारदा द्विवेदी से लेकर रोमिला थापर और अन्य कई लेखकों का इतिहास पढ़ा और समझा कि भारत गणराज्य की भूमिका में राजपूतों की क्या भूमिका रही। अनुराग ने पटियाला रिपोर्ट पढ़ी और उनके सामने कई नई जानकारी सामने आई। इसके बाद अनुराग ने फिल्म की कहानी को बार-बार लिखा और इस तरह गुलाल का जन्म हुआ।
पीयूष मिश्रा को कैसे मिली फिल्म
अनुराग कश्यप ने इसी पोस्ट में लिखा था कि ये फिल्म उनकी सबसे गुस्से वाली फिल्म थी और है। उन्होंने बताया था कि गुलाल गुरु दत्त की फिल्म प्यासा के गानों से प्रेरित थी। गुलाल की कहानी जितना लोगों को पसंद हैं, फिल्म का म्यूजिक भी उतना ही पसंद किया जाता है। जब अनुराग कश्यप फिल्म लिख रहे थे तब उनसे मिलने पीयूष मिश्रा आए थे। वो अपने ऑफिस में फिल्म लिख रहे थे और पीयूष वहीं बैठे थे। उसी वक्त अनुराग से मिलने एक म्यूजिक डायरेक्टर आया और वो अनुराग को नदीम-श्रवण जैसे गाने सुनाने लगा। उस वक्त पीयूष ने उस म्यूजिक डायरेक्टर का हारमोनियम लिया और खुद के लिए गाने जैसे कि सुनो रे किस्सा और जब शहर सोता है, जो उन्होंने प्ले के लिए लिखे थे वो गाने लगे। अनुराग को बहुत पसंद आए और उन्होंने पीयूष मिश्रा को फिल्म के लिए ऑफर किया।
बनते-बनते रह गई थी गुलाल
अनुराग कश्यप की फिल्म लिखकर तैयार थी, लेकिन उनके पास प्रोड्यूसर नहीं था। अनुराग कश्यप की फिल्म बंद हो गई। इसके बाद अनुराग कश्यप ब्लैक फ्राइडे पर काम करने लगे। ब्लैक फ्राइडे में प्रोड्यूसर झामु सुगंध पार्टनर थे। जब कोर्ट ने ब्लैक फ्राइडे की रिलीज पर रोक लगाई तब अनुराग डिप्रेशन मे चले गए थे। उसी वक्त झामू ने गुलाल की स्क्रिप्ट पढ़ी और कहा कि वो गुलाल बनाना चाहते हैं। फिल्म का प्री-प्रोडक्शन शुरू हुआ। 20 दिन फिल्म की शूटिंग हुई लेकिन फिर झामू को फाइनेंस को लेकर कुछ समस्या हुई और फिल्म की शूटिंग रुक गई। इसके बाद अनुराग कश्यप ने नो स्मोकिंग, रिटर्न्स ऑफ हनुमान और डेव डी बनाईं। जब ये फिल्में रिलीज हुईं उसके बाद जी मोशन पिक्चर्स ने गुलाल को उठाया और फिर ये फिल्म बनी और रिलीज हो पाई।
कितनी है गुलाल की आईएमडीबी रेटिंग?
गुलाल की बात करें तो ये फिल्म 13 मार्च 2009 को रिलीज हुई थी। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप हो गई थी, लेकिन आज भी ये फिल्म लोगों की पसंदीदा फिल्मों में से एक है। अगर आप इस फिल्म को देखना चाहते हैं तो यूट्यूब पर देख सकते हैं। फिल्म की आईएमडीबी रेटिंग 8 है।
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