
इंदौर। इंदौर से गायब हो चुके इजिप्शियन वल्चर यानी सफेद गिद्ध एक बार फिर नजर आने लगे हैं। नेचर एंड वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन एंड अवेयरनेस सोसायटी (एनडब्ल्यूसीएएस)के सर्वे में इनकी संख्या भी सामने आई है। यह सफेद गिद्ध देवगुराडिय़ा ट्रेंचिंग ग्राउंड और कंपेल के आसपास उड़ान भर रहे हैं।
देवगुराडिय़ा पहाड़ी और उसके आसपास का क्षेत्र एकमात्र ऐसा स्थान है, जहां गिद्ध की ये प्रजाति का हमेशा से वास रहा है, लेकिन धीरे-धीरे ये यहां से खत्म होते गए। गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) एनडब्ल्यूसीएस हर साल दिसंबर-जनवरी के दौरान गिद्धों की संख्या का अनुमान लगाने के लिए सर्वे करता है, ताकि इंदौर शहर और उसके आसपास इन प्रजाति के गिद्धों की आबादी का आकलन किया जा सके। इस साल डेढ़ महीने के सर्वे के बाद गिद्ध की ये प्रजाति यहां अच्छी संख्या में नजर आई है। इस साल यहां 15 गिद्ध नजर आए है, जो पिछले साल की तुलना में 7 अधिक है। गिद्धों की ये संख्या देवगुराडिय़ा ट्रेंचिंग ग्राउंड के आसपास नजर आई है। हालांकि, 9 साल पहले ये संख्या 83 थी।
खुले में कचरा नहीं फेंकने से हुए कम
जानकार बताते हैं कि बीते कुछ साल में इनकी संख्या में कमी आने का एक कारण खुले क्षेत्रों में कचरा डंपिंग नहीं करना रहा, लेकिन अब बीते दो साल की तुलना में इसमें थोड़ी बढ़ोतरी हुई है, जिसके चलते इन सफेद गिद्धों को भोजन की उपलब्धता आसानी से हुई। ये गिद्ध की वो प्रजाति है, जो कचरे से भी अपना भोजन ढूंढ लेती है। संस्था के जुड़े जानकारों का कहना है कि अगर भविष्य में खुले क्षेत्रों में होने वाली कचरे की प्रोसेसिंग भी कवर्ड प्लांट में होने लगी, तो गिद्धों की इस प्रजाति की आबादी में फिर से गिरावट देखी जा सकती है।
निगम आयुक्त से मिलकर देंगे ज्ञापन
एनडब्ल्यूसीएस के प्रेसिडेंट रवि शर्मा ने बताया कि हम लंबे समय से ये कोशिश कर रहे हैं कि निगम मौजूदा डंपिंग यार्ड के साथ-साथ इंदौर से 15-20 किलोमीटर दूर कचरे की खुले में प्रोसेसिंग के लिए एक स्थान बनाए, ताकि ये गिद्ध कचरे में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया को खा सके। एक बार फिर इस मामले में जल्द ही निगमायुक्त के सामने बात रखी जाएगी।
साल देवगुराडिय़ा कंपेल 2021-22 12 50
2022-23 8 0
2023-24 5 8
2024-25 8 15
2025-26 15 16
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved