
पटना। दुनिया के 74 देशों की नौसेनाओं के अधिकारी जब अचानक बिहार (Bihar) पहुंचे और सफेद वर्दियों में उनका बड़ा जमावड़ा दिखा, तो यह दृश्य लोगों के लिए कौतूहल का विषय बन गया। लेकिन यह कोई सैन्य गतिविधि (military activity) नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक कूटनीति और आध्यात्मिक विरासत से जुड़ा विशेष कार्यक्रम था।
दरअसल, यह सभी विदेशी प्रतिनिधि भारतीय नौसेना द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक आयोजन से पहले एक सांस्कृतिक यात्रा पर आए थे। युद्धाभ्यास और सामरिक प्रदर्शन से पहले इन “समुद्री योद्धाओं” को शांति और सह-अस्तित्व का संदेश देने के लिए भारतीय नौसेना ने उन्हें बुद्ध की ज्ञानस्थली बोधगया का दौरा कराया।
महाबोधि मंदिर में टेका मत्था, ध्यान का लिया अनुभव
20 फरवरी को विदेशी अधिकारियों ने विश्वप्रसिद्ध महाबोधि मंदिर में दर्शन किए। यहीं उस पवित्र स्थल के दर्शन कराए गए, जहां भगवान बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ था।
मंदिर प्रबंधन समिति (BTMC) ने पारंपरिक ‘खादा’ पहनाकर अतिथियों का स्वागत किया। अधिकारियों ने मंदिर परिसर का भ्रमण किया, ध्यान लगाया और बौद्ध दर्शन के मूल संदेश—करुणा, संयम और शांति—को समझने का प्रयास किया।
प्रतिनिधियों ने विशेष रुचि के साथ यह भी जाना कि प्राचीन विरासत और प्राकृतिक धरोहर की देखभाल किस तरह वैज्ञानिक तरीकों से की जाती है।
समुद्री शक्ति से पहले आध्यात्मिक परिचय
फरवरी 2026 में होने वाले अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक आयोजन के तहत दुनिया की कई नौसेनाएं भारत में एक साथ जुटी हैं। इसका मुख्य कार्यक्रम समुद्री शहर विशाखापट्टनम में आयोजित होना है, जहां विभिन्न देशों की नौसेनाएं सामरिक अभ्यास और सहयोगात्मक गतिविधियों में हिस्सा लेंगी। इससे पहले विदेशी मेहमानों को भारत की “सॉफ्ट पावर” से परिचित कराने के उद्देश्य से यह विशेष बोधगया दौरा रखा गया। रणनीतिक सहयोग के साथ-साथ सांस्कृतिक जुड़ाव को मजबूत करना भी इस पहल का अहम उद्देश्य है।
‘अतिथि देवो भव’ की झलक से प्रभावित हुए विदेशी अधिकारी
दौरे के दौरान 74 देशों के प्रतिनिधि जब बिहार की धरती पर एक साथ दिखे, तो यह नजारा अपने आप में अद्वितीय था। मंदिर के भिक्षुओं ने उन्हें बौद्ध इतिहास, स्थापत्य कला और आध्यात्मिक परंपराओं की विस्तार से जानकारी दी। विदेशी अधिकारियों ने अपने अनुभव को “आध्यात्मिक और अविस्मरणीय” बताया। उनका कहना था कि यह यात्रा उन्हें याद दिलाती है कि शक्ति के साथ शांति और संवेदनशीलता का संतुलन जरूरी है।
बिहार से दुनिया तक गया शांति का संदेश
यह यात्रा महज औपचारिक दौरा नहीं थी, बल्कि एक प्रतीकात्मक पहल थी, जहां समुद्रों की रक्षा करने वाली ताकतें बुद्ध की धरती से शांति का पाठ लेकर लौटीं।
बिहार से निकला यह संदेश अब 74 देशों के समुद्री सीमाओं तक पहुंचेगाकि वैश्विक सुरक्षा का आधार केवल सैन्य शक्ति नहीं, बल्कि सहयोग, संवाद और सह-अस्तित्व भी है।
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