
डेस्क: मध्य पूर्व में ईरान (Iran) पर अमेरिकी हमले (US Attack) की आशंका के बीच दुनिया पहले ही तनाव में है, लेकिन इसी उथल-पुथल के बीच अमेरिका ने अचानक एक नया मोर्चा खोल दिया है. इस बार निशाने पर है क्यूबा (Cuba). अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश (Executive Order) पर हस्ताक्षर कर क्यूबा को अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा घोषित कर दिया है. इतना ही नहीं, क्यूबा को तेल सप्लाई करने वाले देशों पर भी अब अमेरिका भारी टैरिफ लगाने की तैयारी में है.
इस आदेश के तहत अमेरिका उन सभी देशों से आने वाले आयात पर अतिरिक्त शुल्क लगाएगा, जो सीधे या परोक्ष रूप से क्यूबा को तेल बेचते या सप्लाई करते हैं. यह आदेश इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट के तहत जारी किया गया है. व्हाइट हाउस का कहना है कि यह फैसला पूरी तरह राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताओं को ध्यान में रखकर लिया गया है.
ट्रंप प्रशासन का आरोप है कि क्यूबा, अमेरिका के दुश्मन देशों और संगठनों के साथ मिलकर काम कर रहा है. आदेश में चीन, रूस और ईरान के साथ-साथ हमास और हिजबुल्लाह जैसे संगठनों का भी जिक्र किया गया है. ट्रंप का दावा है कि क्यूबा अपनी जमीन पर अमेरिका विरोधी ताकतों को सैन्य और खुफिया गतिविधियों के लिए जगह दे रहा है. यहां तक कहा गया है कि क्यूबा में रूस का सबसे बड़ा विदेशी सिग्नल इंटेलिजेंस बेस मौजूद है और चीन के साथ उसकी सैन्य साझेदारी लगातार बढ़ रही है.
इस आदेश का असर क्यूबा की पहले से लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था पर और गहरा पड़ सकता है. क्यूबा इस समय 1959 की क्रांति के बाद के सबसे बड़े आर्थिक संकट से जूझ रहा है. ईंधन की कमी, बिजली कटौती, खाने-पीने की दिक्कतें और गिरता पर्यटन सब कुछ हालात को और बिगाड़ रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, मैक्सिको ने फिलहाल क्यूबा को तेल सप्लाई रोक दी है, हालांकि मैक्सिकन राष्ट्रपति ने इसे अमेरिकी दबाव से इनकार किया है. पिछले महीने तक क्यूबा के कुल तेल आयात में 44% हिस्सा मैक्सिको, 33% वेनेज़ुएला और करीब 10% रूस का था. लेकिन वेनेज़ुएला से सप्लाई पहले ही रुक चुकी है, जिससे क्यूबा गंभीर ऊर्जा संकट में है.
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