कलकत्ता। कलकत्ता हाईकोर्ट (Calcutta High Court) ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि यदि आरक्षित श्रेणी के किसी उम्मीदवार ने कट-ऑफ अंकों से अधिक स्कोर किया है और उसे सामान्य श्रेणी में अपग्रेड कर दिया गया है, तब भी वह आरक्षित श्रेणी का लाभ उठा सकता है। न्यायमूर्ति अमृता सिन्हा ने यह फैसला एक स्कूल सेवा आयोग (SSC) उम्मीदवार की याचिका पर सुनाया। उसने 2025 SLST परीक्षा की पहली सूची में जगह बनाई थी, लेकिन उसे सामान्य श्रेणी में डाल दिए जाने के बाद उसने अपनी अनुसूचित जाति (SC) स्थिति को बहाल करने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
न्यायमूर्ति सिन्हा ने कहा कि याचिकाकर्ता ने फॉर्म भरते समय खुद को आरक्षित श्रेणी का उम्मीदवार चिह्नित किया था और उस श्रेणी के लिए निर्धारित शुल्क 200 जमा किया था। न्यायमूर्ति सिन्हा ने अपने 27 नवंबर के आदेश का हवाला दिया, जिसमें कोर्ट ने यह माना था कि एक बार जब किसी उम्मीदवार की श्रेणी अंतिम हो जाती है तो अधिकारी स्वतः संज्ञान लेकर उसे बदल नहीं सकते हैं।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि आरक्षित वर्ग से सामान्य श्रेणी में जाना उसकी योग्यता पर आधारित है, लेकिन यह उसके मूल आरक्षित वर्ग के अधिकार को समाप्त नहीं करता है।
इस फैसले से यह स्पष्ट हो गया है कि आरक्षित श्रेणी के वे उम्मीदवार जो अपनी योग्यता के आधार पर सामान्य श्रेणी के कट-ऑफ को पार कर जाते हैं, वे सामान्य श्रेणी की सीट पर चयन के साथ-साथ आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवारों को मिलने वाले अन्य लाभ (जैसे आयु सीमा में छूट या शुल्क लाभ) को भी जारी रख सकते हैं। न्यायालय ने इस बात पर जोर दिया कि एक बार जब उम्मीदवार अपनी श्रेणी को अंतिम रूप दे देता है, तो उसे बाद में अधिकारियों द्वारा मनमाने ढंग से बदला नहीं जा सकता है।
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