
उज्जैन। अभी तक तो मध्यप्रदेश को बिजली के मामले में सरप्लस स्टेट माना जा रहा था और अन्य राज्यों के साथ-साथ दिल्ली मेट्रो को भी बिजली बेची जा रही थी, मगर बीते वर्ष की तुलना में इस बार बिजली की मांग में तेजी से वृद्धि हुई और साढ़े 5 हजार मेगावॉट तक खपत बढ़ गई है। इस बार अल्प वर्षा के कारण भी बिजली की मांग में वृद्धि हुई, क्योंकि घरेलू के साथ सिंचाई और कारोबार में भी बिजली की मांग बढ़ी है। लिहाजा अब तीन महीने तक पॉवर मैनेजमेंट कम्पनी बिजली की खरीदी करेगी।
बिजली की अधिकतम मांग वैसे तो इसी साल जनवरी में 19895 मेगावॉट तक पहुंच गई थी। वहीं इस बार रबी फसलों की सिंचाई के अलावा औद्योगिक मांग और घरेलू खपत में भी वृद्धि के चलते 22 हजार मेगावॉट तक पहुंचने की संभावना है, जबकि 17 से 19 हजार मेगावॉट तक अधिकतम मांग रहती आई है। बिजली कम्पनी का मानना है कि सालभर में कनेक्शनों की संख्या में भी तेजी से वृद्धि हुई है। हर श्रेणी के कनेक्शन बढ़े हैं, जिसमें उच्च दाब कनेक्शन, जो बड़े उद्योगों को लगते हैं, के अलावा निम्न दाब, घरेलू बिजली सिंचाई के लिए बिजली की खपत अत्यधिक रहती है। इस बार बारिश कम होने के कारण बांधों में भी पानी कम है और उत्पादन भी प्रभावित हुआ है। बिजली की लगातार बढ़ती मांग के चलते अब अगले महीने नवम्बर से लेकर फरवरी तक तीन महीने बिजली खरीदना पड़ेगी, जिसके लिए देश के बड़े बिजली उत्पादकों, कारोबारियों से दरें भी आमंत्रित की गई हैं, जिसमें सुबह 3 घंटे में अधिकतम 800 मेगावॉट और शाम को अधिकतम 300 मेगावॉट खरीदने का प्रस्ताव दिया गया है। पिछले साल अक्टूबर में जहां बिजली की अधिकतम मांग 11874 मेगावॉट दर्ज की गई थी, लेकिन इस बार अक्टूबर में यह मांग बढ़कर 17313 मेगावॉट तक पहुंच गई, यानी लगभग साढ़े 5 हजार मेगावॉट की वृद्धि सालभर में ही हो गई।
रबी सीजन में किसानों को भी बिजली की अधिक जरूरत पड़ेगी और अभी अक्टूबर महीने में ही गर्मी के तेवर लगातार तीखे रहे हैं, जिसके चलते घर, दफ्तर, दुकान सहित अन्य जगह बिजली की खपत बढ़ गई, क्योंकि एसी चलाना पड़ रहे हैं।
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