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जांच में खुलासा, दिल्ली में धमाके के लिए यासिर ने इस कारण फिदायीन बनने से किया था इनकार

January 19, 2026

नई दिल्‍ली। दिल्ली में लाल किले (Red Fort in Delhi) के पास हुए कार बम धमाके (Car bomb attacks) की जांच में सामने आया है कि साजिश का मास्टरमाइंड डॉ. उमर उन नबी (Dr. Omar Un Nabi) दूसरे आत्मघाती हमलावर की भर्ती करने की कोशिश कर रहा था। हालांकि वह इसमें सफल नहीं हो सका क्योंकि उसके टार्गेट शोपियां के यासिर अहमद डार ने सेब की पैदावार के मौसम में अपने परिवार की मदद करने की जरूरत का हवाला देते हुए फिदायीन बनने से पीछे हट गया था। अधिकारियों ने रविवार को बताया कि डार संभावित दूसरा फिदायीन हमलावर था लेकिन उसके पीछे हटने से डॉ. उमर के मंसूबे पर पानी फिर गया।

यासिर अहमद डार किया गया था अरेस्ट

श्रीनगर पुलिस और एनआईए ने नबी की ओर से चलाए जा रहे एक आतंकी मॉड्यूल का पर्दाफाश किया है। जांच में सामने आया है कि डॉ. नबी ही 10 नवंबर को लाल किले के पास विस्फोटकों से भरी कार ले गया था जिसके धमाके में 12 से ज्यादा लोगों की जान गई थी। पकड़े गए संदिग्धों से पूछताछ में डॉ. नबी की रणनीतियों का खुलासा हुआ है। इन्हीं जानकारी के आधार पर एनआईए ने शोपियां के रहने वाले यासिर अहमद डार को गिरफ्तार किया था।
यासिर को फिदायीन बनने के लिए कर लिया था तैयार

जांच अधिकारियों के अनुसार, डॉ. उमर उन नबी ने यासिर अहमद डार को फिदायीन यानी आत्मघाती हमलावर बनने के लिए तैयार कर लिया था लेकिन पिछले साल अगस्त में वह पीछे हट गया था। उसने अंतिम समय में अपना इरादा बदलने के लिए घर की मरम्मत और सेब के सीजन का बहाना बनाया। जांच में सामने आया है कि डार साल 2023 से ही नबी के संपर्क में था। डॉ. उमर के जरिए उसको पूरी तरह कट्टरपंथी बनाया जा चुका था।



  • डॉक्टरों की बातें डालती थीं गहरा असर

    यासिर अहमद डार ने माना कि डॉ. उमर उन नबी का डॉक्टर होना उसे प्रभावित करने की सबसे बड़ी वजह थी। डॉक्टर होने के कारण उसकी कट्टरपंथी बातें ज्यादा सच और प्रभावशाली लगती थीं। जांच में पता चला है कि डॉ. उमर उन नबी न केवल एक आतंकी था वरन वह बड़ी चतुराई से नई भर्तियां भी कर रहा था। वह व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल के पकड़े जाने पर भी हमले जारी रखने के लिए अलग से गुप्त टीम तैयार कर रहा था ताकि हमलों को अंजाम दिया जा सके।
    शारीरिक फिटनेस के दिए जाते थे निर्देश

    जांच के दौरान एक आरोपी के फोन से एक वाइस नोट मिला है। इसमें डॉ. उमर जिहाद के लिए वफादारी की शपथ दिला रहा है। पढ़ाई बीच में छोड़ने वाले यासिर अहमद डार का नाम पहले भी जांच में आया था क्योंकि उसका एक दोस्त आतंकी संगठनों से जुड़ा था। अधिकारियों ने बताया कि डार टेलीग्राम ऐप के जरिए नबी के संपर्क में रहता था। डार को हमेशा शारीरिक फिटनेस बेहतर बनाए रखने के निर्देश दिए जाते थे।
    फियादीन को जरूरी मानता था उमर

    जांच अधिकारियों के अनुसार, यासिर अहमद डार दूसरा शख्स था जिसे डॉ. उमर उन नबी आत्मघाती हमलावर बनाने की कोशिश कर रहा था। डॉ. उमर का मानना था कि आतंकी हमलों को अंजाम देने के लिए आत्मघाती हमलावरों का होना बहुत जरूरी है। पिछले साल जब श्रीनगर पुलिस ने इस मॉड्यूल का पर्दाफाश किया था तब दक्षिण कश्मीर के काजीगुंड से यासिर अहमद डार उर्फ दानिश को गिरफ्तार किया गया था।
    आत्मघाती हमलावर बनने को तैयार हो गया था डॉ. उमर

    यासिर ने माना कि अक्टूबर 2024 में कुलगाम की एक मस्जिद में उसका संपर्क डॉक्टर टेरर मॉड्यूल से हुआ था। उसे फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी के पास एक किराए के कमरे में ले जाया गया था। यासिर ने बताया कि इस आतंकी मॉड्यूल के सदस्य उसे जैश-ए-मोहम्मद में शामिल करना चाहते थे। डॉक्टर उमर नबी ने यासिर को महीनों तक इतना भड़काया कि वह आत्मघाती हमलावर बनने को तैयार हो गया था।
    इस वजह से फिदायीन से पीछे हो गया था यासिर

    यह साजिश पिछले साल अप्रैल में नाकाम हो गई क्योंकि यासिर ने पीछे हटने का फैसला कर लिया था। उसने खराब आर्थिक स्थिति और इस्लाम में सुसाइड की मनाही होने का हवाला दिया। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. जीवी संदीप चक्रवर्ती की अगुवाई में श्रीनगर पुलिस ने इस मॉड्यूल का पर्दाफाश किया था। पुलवामा का 28 वर्षीय डॉ. उमर नबी कश्मीर, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में फैले टेरर नेटवर्क के मास्टर माइंड के रूप में सामने आया।
    भीड़ वाली जगह पर हमला करना चाहता था डॉ. उमर

    माना जा रहा है कि डॉ. उमर 6 दिसंबर को बाबरी मस्जिद विध्वंस वाले दिन वाहन से आतंकी हमले की साजिश रच रहा था। विस्फोटक से भरे वाहन को वह किसी भीड़ वाली जगह पर रखना चाहता था। पूछताछ में पता चला है कि डॉ. उमर उन नबी में बदलाव 2021 में सह-आरोपी डॉ. मुजम्मिल अहमद गनई के साथ तुर्किये की यात्रा के बाद शुरू हुआ। वे तुर्किये में जैश-ए-मोहम्मद के हैंडलर से मिले थे।
    तुर्की दौरे के बाद जुटाने लगे थे मौत का सामान

    तुर्की दौरे के बाद ही डॉ. उमर और डॉ. मुजम्मिल अहमद गनई ने विस्फोटक जमा करने शुरू किए थे। इसमें 360 किलो अमोनियम नाइट्रेट, पोटेशियम नाइट्रेट और सल्फर शामिल था। विस्फोटक का ज्यादा हिस्सा अल फलाह यूनिवर्सिटी परिसर के पास जमा किया गया था। यह साजिश तब फेल हो गई जब डॉ. मुजम्मिल अहमद गनई पकड़ा गया था। विस्फोटक भी जब्त कर लिए गए थे। इससे डॉ. उमर घबरा गया और दिल्ली में धमाका कर दिया।
    ऐसे हुए था टेरर मॉड्यूल का भंडाफोड़

    पिछले साल 19 अक्टूबर को श्रीनगर के बाहरी इलाके में बानपोरा, नौगाम में दीवारों पर जेईएम के पोस्टर दिखने की घटना के बाद इस आतंकी नेटवर्क का भंडाफोड़ हुआ था। इसके बाद आरिफ निसार डार उर्फ ​​साहिल, यासिर उल अशरफ और मकसूद अहमद डार उर्फ ​​शाहिद को गिरफ्तार किया गया था। मौलवी इरफान अहमद को गिरफ्तार किया गया था। उस पर डॉक्टरों को कट्टरपंथी बनाने का आरोप है।

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