
इंदौर, विकाससिंह राठौर। सफेद नजर आने वाला पनीर इस समय शहर में काले और मिलावटी कारोबार का सबसे बड़ा चेहरा बन चुका है। इंदौर में रोजाना 5 हजार किलो से ज्यादा नकली पनीर बिक रहा है। लोग इसे असली समझकर ऊंची कीमत देकर खरीद रहे हैं और खा रहे हैं, लेकिन ज्यादातर नहीं जानते कि वे पनीर नहीं धोखा खा रहे हैं।
असली पनीर जहां शुद्ध दूध से बनाया जाता है, जिसमें मिल्क फेट (क्रीम) होता है, वहीं नकली पनीर को सप्रेटा दूध (क्रीम निकला दूध) से बनाया जा रहा है। क्रीम न होने से पनीर रूखा न नजर आए, इसलिए क्रीम की कमी पूरी करने के लिए पॉम आइल का इस्तेमाल किया जा रहा है। शहर में पिछले कुछ समय में खाद्य औषधि विभाग द्वारा अलग-अलग डेरी और होटलों पर कार्रवाई करते हुए पनीर के नमूने लिए गए थे। इनकी जांच रिपोर्ट में सामने आया है कि जिसे पनीर के रूप में बेचा और इस्तेमाल किया जा रहा था वह असली पनीर न होकर एनालॉग पनीर या आम भाषा में नकली पनीर था, जिसमें क्रीम के बजाय पॉम आइल पाया गया है।
सरकार ने खुद नकली यानी एनालॉग पनीर कोबेचने की दी है मंजूरी
मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी मनीष स्वामी ने बताया कि खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम में पनीर की परिभाषा में मिल्क क्रीम जरूरी है। वहीं एक्ट में एनालॉग पनीर को भी शामिल किया गया है, जिसे क्रीम निकले दूध में पॉम या अन्य आइल मिलाकर तैयार किया जाता है। लेकिन एक्ट में साफ लिखा गया है कि इस तरह का पनीर एनालॉग पनीर के नाम से बेचा जाएगा और इसे खुला नहीं बेचा जा सकेगा। इसकी पैकिंग पर निर्माता को इसे बनाने में इस्तेमाल होने वाले पदार्थों जैसे पॉम आइल सहित अन्य केमिकल्स का उल्लेख करना होगा, लेकिन इस समय जो पनीर इंदौर में कई स्थानों पर पकड़ा गया है वह खुले रूप से ही बेचा जा रहा था।
कीमत में 2 से 3 गुना का अंतर, कई डेरी और होटलों पर यही बिक रहा
स्वामी ने बताया कि सप्रेटा दूध से बनाया जाने वाला पनीर रूखा होता है, इसलिए उसमें सॉफ्टनेस लाने के लिए पॉम आइल मिलाया जाता है। इसका स्वाद सामान्य पनीर से थोड़ा अलग होता है, लेकिन ज्यादातर लोग पनीर को सब्जी में इस्तेमाल करते हैं, इसलिए मसालों के कारण इस पर ज्यादा ध्यान नहीं जाता है। नकली पनीर जहां 150 से 180 रुपए किलो में मिलता है, वहीं असली पनीर की कीमत 350 से 450 रुपए प्रतिकिलो तक है। कीमत में दो से तीन गुना का अंतर होने के कारण ही कई डेरी संचालक और होटल संचालक असली के बजाय नकली बनाकर बेच और इस्तेमाल कर रहे हैं। चिंताजनक बात यह भी है कि इसे सामान्य तौर पर आसानी से पहचानने या परखने की कोई विधि भी नहीं है।
गुजरात है गढ़, सीहोर में भी फैक्ट्री
स्वामी ने बताया कि जब पूरे मामले की गहराई से जांच की गई तो सामने आया कि इंदौर में रोजाना चार से पांच हजार किलो नकली पनीर आ रहा है। सबसे ज्यादा पनीर गुजरात से बसों में आता है। वहीं सीहोर में भी एनालॉग पनीर की एक फैक्ट्री है, जिसके पास लाइसेंस भी है। लेकिन जानकारी मिली है कि यहां से भी पैकिंग के बजाय खुले में पनीर को बसों से इंदौर भेजा जा रहा है। बसों से उतरकर गाडिय़ों में यह कई डेरियों और होटलों तक पहुंच रहा है। इसे देखते हुए अब टीम बसों और डेरियों पर विशेष अभियान चलाने की तैयारी कर रही है। पिछले दिनों भारी मात्रा में नकली पनीर को नष्ट भी किया गया है।
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