
मरीज के परिजन ने कहा- हमारे लिए मंत्री विजयवर्गीय ने कर दी पूरी व्यवस्था
इन्दौर। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) का बाम्बे हॉस्पिटल (Bombay Hospital) में जाकर मरीजों (Patients) के परिजनों (Relatives) से मिलने का अनुभव कड़वा रहा है। यहां पर इन परिजनों ने उन्हें खरी-खरी सुना दी और बता दिया कि मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने उनके इलाज की व्यवस्था करवा दी है।
गांधी कल इंदौर में पहुंचने के बाद विमानतल से सीधे अस्पताल पहुंचे थे। अस्पताल में भागीरथपुरा के 8 मरीज भर्ती हैं। योजना के अनुसार राहुल गांधी को इन मरीजों के परिजनों से मिलवाया जाना था और कुछ मरीज के पास जाकर उनके हाल-चाल पूछना थे। इसके लिए राहुल जैसे ही अस्पताल में पहुंचकर पहले मरीज के परिजन से मिले तो वहीं से माहौल बिगडऩा शुरू हो गया था। इस अस्पताल में जिस भी मरीज के परिजन से राहुल ने मुलाकात की, उन सभी ने एक तरफ जहां मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की तारीफ की, वहीं दूसरी तरफ उनके लिए की गई उपचार की व्यवस्थाओं को बेहतर बताया। इस दौरान बातचीत में मरीज के परिजनों द्वारा कांग्रेस को आड़े हाथों लेने में भी कोई कसर नहीं रखी गई। किसी मरीज के परिजन ने कहा कि कांग्रेस ने आंदोलन करने के सिवाय किया क्या है तो किसी ने कहा कि कांग्रेस के नेताओं को हमारे दुख में शामिल होने की फुर्सत नहीं है। वह तो आते हैं और फोटो खिंचवाकर चले जाते हैं। इस अस्पताल में राहुल गांधी को बुरा अनुभव मिला। अस्पताल में जब राहुल मरीज के परिजनों से बात कर रहे थे तो शुरुआत में प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष जीतू पटवारी पास में खड़े हुए थे, लेकिन जैसे ही उन्होंने माहौल बिगड़ता हुआ देखा तो वे तत्काल दूरी पर खड़े हो गए। एक मरीज के परिजन ने कहा कि हम लोगों के पास तो सरकारी अस्पताल में भी इलाज कराने जितने पैसे नहीं थे, लेकिन यह तो सरकार की ही व्यवस्था थी कि आज सबसे बड़े अस्पताल में हमारे मरीज का इलाज हो रहा है। वैसे तो राहुल गांधी के आगमन के एक दिन पहले से ही प्रदेश कांग्रेस द्वारा अलग-अलग स्थान पर प्रभारी बनाकर उन्हें जिम्मेदारी सौंप दी गई थी। उनसे कहा गया था कि संबंधित स्थान पर जिन लोगों से राहुल गांधी मिलेंगे, उन लोगों से चर्चा कर इस बात की जानकारी दे दें कि राहुल गांधी उनसे मिलने आ रहे हैं। वे लोग उन्हें अपनी समस्या की जानकारी दें। इस व्यवस्था के तहत उक्त अस्पताल में भर्ती मरीजों और उनके परिजनों को संभालने की व्यवस्था इंदौर जिला कांग्रेस के अध्यक्ष विपिन वानखेड़े को सौंप गई थी। उन्होंने अस्पताल में जाकर एक दिन पहले मरीज के परिजनों से मुलाकात तो कर ली थी, लेकिन उन्हें राहुल गांधी की यात्रा के बारे में नहीं बताया था। इसके साथ ही यह भी नहीं कहा था कि इस मुलाकात में क्या बात करना है।
बैरिकेडिंग पर होते रहे विवाद
जैसे ही राहुल गांधी अस्पताल से भागीरथपुरा के लिए रवाना हुए तो भागीरथपुरा में जाने के रास्तों को पुलिस ने बंद कर दिया। सभी रास्तों पर बैरिकेडिंग कर दी गई। सभी आने जाने वाले लोगों को उन रास्ते से आने जाने से रोक दिया गया। इस दौरान कई लोग यह कह रहे थे कि उनके घर तो यहीं पर पास में है, इसके बावजूद आने जाने नहीं दिया गया। इस स्थिति को लेकर कई स्थानों पर विवाद के हालात बन गए। ऐसे में लोगों को अपनी गाड़ी कहीं और खड़ी कर पैदल जाना पड़ा।
खूब हुई धक्का-मुक्की
जब राहुल गांधी भागीरथपुरा में दो मृतकों के घर पर शोक व्यक्त करने के लिए गए तो वहां पर खूब धक्का-मुक्की हुई। कांग्रेस के बड़े नेता भी राहुल गांधी के साथ इन मकानों में जाना चाहते थे। सुरक्षाकर्मियों ने इन बड़े नेताओं को भी रोक दिया। गीताबाई के मकान पर जाने के बाद जब राहुल गांधी वहां से जीवन के घर जाने लगे तो उन्हें बताया गया कि घर पास में ही है तो कार में सवार होने के बजाय पैदल ही चल पड़े। उनके चारों तरफ सुरक्षाकर्मी और फिर रस्सी का घेरा बनाकर पुलिसकर्मी चल रहे थे।