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अमेरिकी एक्सपर्ट का बड़ा दावा, बोले- ट्रंप सबसे ताकतवर नहीं, मोदी और जिनपिंग हैं सबसे आगे

January 23, 2026

नई दिल्‍ली । अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (US President Donald Trump) के मुकाबले जानकार चीनी समकक्ष शी जिनपिंग (Xi Jinping) और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) को ज्यादा ताकतवर मान रहे हैं। उनका कहना है कि कई मायने में ये दोनों नेता ट्रंप से ज्यादा बेहतर स्थिति में हैं। यह बयान ऐसे समय पर आया है, जब ट्रंप लगातार टैरिफ के जरिए अमेरिकी के मोटे मुनाफे, युद्ध रुकवाने और नोबेल के हकदार होने जैसे दावे कर रहे हैं।

मीडिया से बातचीत में राजनीतिक जानकार इयन ब्रेमर ने कहा कि अमेरिका सबसे शक्तिशाली देश है, लेकिन ऐसा ट्रंप की स्थिति में नहीं कहा जा सकता। उन्होंने कहा, ‘राष्ट्रपति ट्रंप सबसे ताकतवर नेता नहीं हैं। शी जिनपिंग हैं। ऐसा क्यों। क्योंकि जिनपिंग के पास मिडटर्म इलेक्शन नहीं है। उनके पास स्वतंत्र न्यायपालिका नहीं है। ट्रंप तीन सालों में पद पर नहीं रहेंगे, लेकिन जिनपिंग रहेंगे।’

उन्होंने कहा, ‘जब ट्रंप मीडिया और सुर्खियां बटोर रहे हैं, शी जिनपिंग उनसे ज्यादा बेहतर स्थिति में हैं। मोदी बेहतर स्थिति में हैं।’ ब्रेमर ने कहा कि पीएम मोदी का लंबा कार्यकाल उन्हें बदलाव और लंबी अवधि के फायदे देखने की अनुमति देता है। जबकि, ट्रंप या कई यूरोपीय नेताओं के मामले में ऐसा नहीं है।


  • उन्होंने कहा, ‘एक नेता के तौर पर, मोदी का लंबे समय तक सत्ता में बने रहना और उनकी नीतियों में निरंतरता उन्हें कई यूरोपीय नेताओं के मुकाबले ज्यादा प्रभावी ढंग से अपनी बात रखने या दबाव का सामना करने की ताकत देती है। और हमने पिछले कुछ समय में ऐसा होते देखा भी है।’

    ट्रंप के बोर्ड से कई बड़े नेता दूर
    ट्रंप ने हमास और इजराइल के बीच हुए युद्धविराम को बनाए रखने के प्रयासों का नेतृत्व करने के लिए गुरुवार को अपने ‘शांति बोर्ड’ का औपचारिक रूप से अनावरण किया। हालांकि अमेरिका के कई शीर्ष सहयोगी इसमें हिस्सा नहीं लेने का विकल्प चुना। रूस फिलहाल विचार कर रहा है, ब्रिटेन ने हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया।

    फ्रांस के इनकार के बाद नॉर्वे और स्वीडन ने संकेत दिया है कि वे इसमें शामिल नहीं होंगे। फ्रांसीसी अधिकारियों ने रेखांकित किया कि उनका देश गाजा शांति योजना का समर्थन करता है, लेकिन उसे इस बात की चिंता है कि यह बोर्ड संघर्षों के समाधान के मुख्य मंच के रूप में संयुक्त राष्ट्र की जगह लेने की कोशिश कर सकता है।

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