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ट्रंप के टैरिफ झटके से उबरता भारत, एक मेगा डील से 10 गुना मुनाफे की तैयारी

January 26, 2026

 

नई दिल्‍ली। भारत और यूरोप(India and Europe) के बीच मुक्‍त व्‍यापार समझौता(Free Trade Agreement) अब अंतिम चरण(Now the final stage)में पहुंच गया है. अगर यह समझौता पूरा होता है तो भारत(India) को उस नुकसान की पूरी तरह भरपाई हो जाएगी, जो ट्रंप के टैरिफ लगाने के बाद निर्यात को हुआ है.

अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप(US President Donald Trump) ने पिछले साल अप्रैल और अगस्‍त में भारत पर 25-25 फीसदी का टैरिफ लगाया था. भारत से अमेरिका जाने वाले उत्‍पादों पर 50 फीसदी टैरिफ लगाए जाने के बाद भारतीय निर्यात क्षेत्र को करीब 6 अरब डॉलर का नुकसान हुआ था. अब भारत ने ऐसा दांव खेला है कि सिर्फ एक डील से न सिर्फ इस पूरे नुकसान की भरपाई हो जाएगी, बल्कि इस नुकसान के मुकाबले 10 गुना ज्‍यादा कमाई हो जाएगी. यह डील कल यानी 27 जनवरी को पूरी होने का अनुमान है और इससे भारत एकसाथ 27 देशों को साधने में सफल होगा.


  • भारत(India) और(and) यूरोपीय यूनियन मुक्‍त व्‍यापार समझौते(the European Union Free Trade Agreement) (FTA) पर 27 जनवरी को हस्‍ताक्षर कर सकते हैं. दोनों पक्षों के नेताओं ने इसे ‘मदर ऑफ आल डील’ का नाम दिया है, क्‍योंकि इस एक डील से ही भारत को यूरोप के 27 देशों में बिना शुल्‍क के कारोबार करने की अनुमति मिल जाएगी. फिलहाल यूरोपीय यूनियन की अध्‍यक्ष भारत में गणतंत्र दिवस के मौके पर बतौर मुख्‍य अतिथि मौजूद हैं. इस दौरान दोनों देशों के बीच ट्रेड को लेकर बातचीत भी हुई है और अब इस पर अंतिम मुहर लगने का इंतजार है.

    भारतीय निर्यात को कितना फायदा
    भारत और यूरोप के बीच में फ्री ट्रेड एग्रीमेंट होता है तो भारतीय निर्यात का ट्रेड सरप्‍लस करीब 50 अरब डॉलर बढ़ जाएगा. एमके ग्‍लोबल ने अपनी शोध में बताया है कि यह डील पूरी हुई तो वित्‍तवर्ष 2031 तक भारत का यूरोप के साथ ट्रेड सरप्‍लस 50 अरब डॉलर का हो जाएगा. वित्‍तवर्ष 2025 में भारत के कुल निर्यात में यूरोप की हिस्‍सेदारी 17.3 थी, जो इस डील के बाद 2031 तक 22 से 23 फीसदी तक पहुंचने का अनुमान है.

    यूरोप के लिए भी फायदे की डील
    यह डील सिर्फ भारत को ही नहीं, बल्कि यूरोपीय बाजार को भी फायदा पहुंचाएगी. भले ही अभी यूरोप के निर्यात बाजार में भारत की हिस्‍सेदारी महज 0.8 फीसदी है, लेकिन वित्‍तवर्ष 2025 में यूरोप का भारत के साथ 15 अरब डॉलर का व्‍यापार घाटा रहा था. वित्‍तवर्ष 2019 में यूरोप का भारत के साथ 3 अरब डॉलर का ट्रेड सरप्‍लस था. अगर यह डील पूरी होती है तो निश्चित रूप से भारत के कारोबार को और गति मिलेगी और भारत का यूरोप के साथ ट्रेड सरप्‍लस और भी ज्‍यादा हो जाएगा.

    किस सेक्‍टर को सबसे ज्‍यादा लाभ
    यूरोप के साथ फ्री ट्रेड डील पूरी होने से भारत के इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स, मशीनरी और केमिकल उद्योग को सबसे ज्‍यादा लाभ मिलेगा. चालू वित्‍तवर्ष में भारत के कुल निर्यात में यूरोप की हिस्‍सेदारी मामूली रूप से गिरकर 16.8 फीसदी पर आ गई है. यह अलग बात है कि इस डील से भारत के साथ यूरोप का व्‍यापार घाटा और बढ़ जाएगा. बावजूद इसके यूरोप ने रूस के ऊपर अपनी ऊर्जा निर्भरता कम करने और चीन की सप्‍लाई का विकल्‍प खोजने की तैयारी कर ली है. यूरोप में अभी से भारतीय रिफाइनरी के तेल, इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स और केमिकल की खरीद बढ़ गई है. एफटीए के बाद इसमें और बढ़ोतरी हो जाएगी.

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