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बलूच विद्रोहियों के हमलों से हिला पाकिस्तान, अमेरिका और चीन के लिए क्यों है यह बड़ा संकेत

February 02, 2026

इस्लामाबाद। पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत (Balochistan Province) में बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) ने शनिवार को एक साथ कई इलाकों में बड़े पैमाने पर हिंसक हमले (violent attacks) किए। ‘हेरोफ-2’ नाम दिए गए इस अभियान के तहत क्वेटा, ग्वादर, मस्तुंग, नोशकी, कलात, खारान और पंजगुर जैसे जिलों में आत्मघाती हमले, गोलीबारी और बम धमाके किए गए। इन हमलों में पुलिस थाने, जेल, सरकारी इमारतें, सुरक्षा ठिकाने और आम नागरिक क्षेत्र निशाने पर रहे।



  • मस्तुंग में जेल पर हुए हमले के बाद करीब 30 कैदियों के फरार होने की खबर है। वहीं ग्वादर में प्रवासी मजदूरों के कैंप पर किए गए हमले में 11 लोगों की मौत हो गई, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल बताए जा रहे हैं। बीएलए ने दावा किया है कि इस अभियान में उसके लड़ाकों ने 84 पाकिस्तानी सुरक्षा कर्मियों को मार गिराया और 18 को जिंदा पकड़ लिया, जबकि संगठन के सात लड़ाके मारे गए।

    पाकिस्तानी अधिकारियों का कहना है कि इन हमलों में कुल मिलाकर करीब 200 लोगों की जान गई, जिनमें 31 नागरिक और 17 सुरक्षाकर्मी शामिल हैं। सेना ने जवाबी कार्रवाई का हवाला देते हुए दावा किया है कि 145 बीएलए लड़ाकों को ढेर कर दिया गया। बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री सरफराज बुग्टी ने बीबीसी से बातचीत में स्वीकार किया कि मृतकों में आम नागरिकों के साथ-साथ सुरक्षा बलों के जवान भी शामिल हैं।

    पाकिस्तानी सेना ने इन हमलों के पीछे भारत का हाथ होने का आरोप लगाया है, हालांकि भारत ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि पाकिस्तान अपनी आंतरिक विफलताओं से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहा है। यह ताजा हिंसा बलूचिस्तान में दशकों से चल रहे अलगाववादी संघर्ष की गंभीरता को उजागर करती है।

    बलूचिस्तान पाकिस्तान के लिए क्यों है अहम
    बलूचिस्तान क्षेत्रफल के लिहाज से पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है और रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यह ईरान और अफगानिस्तान से सटा हुआ है और अरब सागर तक सीधी पहुंच देता है। यहां प्राकृतिक गैस, कोयला, तांबा, सोना और अन्य दुर्लभ खनिजों के बड़े भंडार मौजूद हैं। सुई गैस फील्ड जैसे संसाधन पाकिस्तान की ऊर्जा जरूरतों की रीढ़ माने जाते हैं।

    इसके अलावा ग्वादर बंदरगाह चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) का केंद्र है, जो चीन की बेल्ट एंड रोड पहल का अहम हिस्सा है। यह परियोजना चीन को मलक्का जलडमरूमध्य पर निर्भरता कम करने और ऊर्जा आपूर्ति का वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराती है।

    अमेरिका और चीन के लिए क्यों है यह चेतावनी
    बलूचिस्तान में बढ़ती हिंसा अमेरिका और चीन दोनों के लिए चिंता का विषय बनती जा रही है। अमेरिका ने हाल ही में रेको डिक खदान में अहम खनिजों के लिए 1.25 अरब डॉलर के निवेश की घोषणा की है, साथ ही दुर्लभ पृथ्वी तत्वों को लेकर 500 मिलियन डॉलर का समझौता भी किया गया है। दूसरी ओर चीन के लिए सीपीईसी और ग्वादर पोर्ट उसकी क्षेत्रीय रणनीति का आधार हैं।

    बीएलए लंबे समय से आरोप लगाता रहा है कि बाहरी शक्तियां बलूचिस्तान के संसाधनों का दोहन कर रही हैं, जबकि स्थानीय आबादी को इसका कोई ठोस लाभ नहीं मिल रहा। हालिया हमले न सिर्फ पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हैं, बल्कि विदेशी निवेशकों के लिए भी यह साफ संदेश देते हैं कि इस क्षेत्र में स्थिरता अभी दूर है।

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