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World Cancer Day: भारत में चुपके से फैल रहे हैं ये 5 तरह के कैंसर, अनदेखा करने की ना करें गलती, जानें लक्षण…

February 04, 2026

नई दिल्ली. दुनिया भर में 4 फरवरी को वर्ल्ड कैंसर डे (World Cancer Day) के रूप में मनाया जाता है. इस दिन कैंसर अवेयरनेस (Cancer Awareness) के लिए कई कैंप (camp) लगाए जाते हैं और लोगों को इस बीमारी के लक्षण और रोकथाम के लिए अवेयर किया जाता है. दुनिया के साथ-साथ भारत में भी कैंसर के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं इसलिए स्वास्थ्य विशेषज्ञ समय-समय पर चेतावनी देते रहते हैं और अवेयर करते रहते हैं.

भारत में कुछ खास तरह के कैंसर ‘साइलेंट किलर’ (Silent Killer) की तरह पैर पसार रहे हैं और लोग अक्सर उनके शुरुआती संकेतों को सामान्य कमजोरी या छोटी-मोटी बीमारी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं और यही सबसे बड़ी गलती साबित होती है.


  • कैंसर के लक्षणों की समय पर पहचान और सही इलाज ही इस जानलेवा बीमारी से बचने का एकमात्र तरीका माना जाता है. तो आइए जानते हैं उन 5 तरह के कैंसर के बारे में जो भारतीयों को सबसे ज्यादा अपना शिकार बना रहे हैं और उनके शुरुआती लक्षण क्या हैं.

    ब्रेस्ट कैंसर
    भारत की महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के मामले सबसे अधिक देखे जा रहे हैं. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अब यह बीमारी सिर्फ अधिक उम्र की महिलाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि कम उम्र की महिलाएं भी इसकी चपेट में आ रही हैं.

    यदि किसी के ब्रेस्ट में किसी तरह की गांठ महसूस हो रही है, निप्पल से डिस्चार्ज हो रहा है या ब्रेस्ट के साइज में अचानक से बदलाव हुआ है तो वो उसके शुरुआती संकेत हो सकते हैं. यदि गांठ है लेकिन उसमें दर्द नहीं है तो भी इसे हल्के में न लें.

    ओरल कैंसर 
    तंबाकू आदि के सेवन के कारण भारत को दुनिया में ओरल कैंसर तेजी से फैल रहा है. ये मुख्य रूप से गुटखा, खैनी और तंबाकू का अत्यधिक सेवन से होता है. मुंह का कैंसर अक्सर बहुत देर से पता चलता है क्योंकि लोग कैंसर के शुरुआती लक्षणों को तेज चूना खाना या फिर सामान्य छाले समझकर अनदेखा कर देते हैं.

    मुंह के अंदर घाव या छाले जो हफ्तों तक ठीक न हो, सफेद या लाल पैच, आवाज में भारीपन या निगलने में तकलीफ होना इसके शुरुआती लक्षण हैं.

    सर्वाइकल कैंसर 
    भारतीय महिलाओं में मौत का दूसरा सबसे बड़ा कारण सर्वाइकल कैंसर ही है. हालांकि राहत की बात है कि समय पर स्क्रीनिंग और वैक्सीन के जरिए इसे रोका जा सकता है. पीरियड साइकिल के बीच में या इंटरकोर्स के बाद ब्लीडिंग होना, पीठ के निचले हिस्से में लगातार दर्द और असामान्य डिस्चार्ज होना इसके कॉमन लक्षण हैं.

    फेफड़ों का कैंसर
    लंग्स यानी फेफड़ों का कैंसर सिगरेट ना पीने वाले लोगों में भी तेजी से फैल रहा है. एक्सपर्ट के मुताबिक, बढ़ता प्रदूषण और पैसिव स्मोकिंग इसके बड़े कारण हैं. लंग्स कैंसर के लक्षण अक्सर तब दिखते हैं जब बीमारी गंभीर स्टेज पर पहुंच जाती है. लगातार खांसी बने रहना, बलगम में खून आना, सांस फूलना और अचानक वजन कम होना इसके लक्षण हो सकते हैं.

    कोलोरेक्टल कैंसर 
    जंक फूड और कम फाइबर वाली डाइट के कारण युवाओं में कोलोरेक्टल (कोलन) कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. लोग अक्सर पेट की समस्याओं को गैस या कब्ज समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. पेट साफ न होना, मल के साथ खून आना, पेट में मरोड़ और भूख न लगना इसके लक्षण हो सकते हैं.

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