img-fluid

दिल्ली एम्स का कमाल…. बनाया AI प्लेटफार्म ‘श्वासा’, यह खांसी की आवाज से जान लेगा बीमारी

February 19, 2026

नई दिल्ली। मेडिकल (Medical) के क्षेत्र में भी एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI – Artificial Intelligence) की भूमिका तेजी से बढ़ रही है। दिल्ली एम्स (Delhi AIIMS) के डॉक्टरों ने कर्नाटक में विकसित किए गए ‘श्वासा’ (Shwasa) नाम के एक एआई प्लेटफार्म (मोबाइल ऐप) पर अध्ययन किया है। यह एआई ऐप स्मार्टफोन के माध्यम से किसी भी मरीज की खांसी की आवाज सुनकर उसका विश्लेषण करता है और इसके आधार पर जान लेता है कि मरीज को फेफड़ो या श्वसन तंत्र की कौन सी बीमारी है।

गंभीर बीमारी की भी हो सकती है पहचान
एम्स के विशेषज्ञों का दावा है कि इस एआई तकनीक के जरिए क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) जैसी गंभीर बीमारी की भी पहचान की जा सकती है। दिल्ली एम्स के सेंटर फॉर कम्युनिटी मेडिसिन के एडिशनल प्रोफेसर डॉ. हर्षल रमेश साल्वे ने बताया कि कर्नाटक में विकसित इस एआई आधारित ऐप पर उत्तर भारत में किसी भी संस्थान ने अध्ययन नहीं किया था। दिल्ली एम्स के डॉक्टरों ने इस पर अध्ययन किया।


  • अध्ययन में सटीक रहे नतीजे
    डॉ. हर्षल रमेश साल्वे ने बताया कि अध्ययन के दौरान 460 लोगों की खांसी के सैंपल इसमें डाले गए और उनके आधार पर एआई ने विश्लेषण कर जांच की। काफी हद तक इसका विश्लेषण और परिणाम सही पाए गए। यह किसी भी स्मार्ट फोन के जरिए इस्तेमाल किया जा सकता है।

    फायदेमंद होगा यह ऐप
    दिल्ली एम्स के सेंटर फॉर कम्युनिटी मेडिसिन के एडिशनल प्रोफेसर डॉ. हर्षल रमेश साल्वे ने बताया कि एक बार स्मार्टफोन पर रिकॉर्ड होने के बाद यह एआई ऐप सांस की नली में रुकावट या फेफड़ों की असामान्यताओं के संकेतों की पहचान करने के लिए सूक्ष्म आवाजों के पैटर्न का विश्लेषण करता है और महज पांच मिनट से भी कम समय में परिणाम बता देगा।

    यह फायदा होगा
    दिल्ली एम्स के एडिशनल प्रोफेसर डॉ. साल्वे ने बताया कि फेफड़ों की बीमारी की जांच के लिए स्पाइरोमीटर की जरूरत पड़ती है। यह मशीन बहुत महंगी है और इसे चलाने के लिए एक्सपर्ट की जरूरत होती है। छोटे शहरों या ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक या सेकेंडरी चिकित्सा केंद्रों पर ऐसी मशीनों को लगाया जाना बहुत खर्चीला होगा।

    यहां किया जा सकता है इस्तेमाल
    इसके लिए बड़ी संख्या में विशेषज्ञों की भी जरूरत होगी। लेकिन एआई आधारित इस प्लेटफार्म पर फेफड़ों की जांच के लिए न तो मशीन और न ही विशेषज्ञों की जरूरत पड़ेगी। अस्पतालों में तैनात स्टाफ भी इससे जांच कर सकेगा। इसका इस्तेमाल ‘आयुष्मान आरोग्य मंदिर’ जैसे प्राइमरी स्वास्थ्य केंद्रों में भी किया जा सकता है।

    ऐसे करता है काम
    यह एआई आधारित ऐप मोबाइल के जरिए मरीजों की खांसी को रिकॉर्ड करता है। दिल्ली एम्स के डॉक्टर हर्षल रमेश साल्वे ने बताया कि जिस तरह डॉक्टर स्टेथोस्कोप लगाकर मरीजों की धड़कनों को सुनते हैं, वैसे ही यह तकनीक खांसी की आवाज की बारीकियों को समझती है और खांसी के साथ मरीज के लक्षणों को मिलाकर एक हेल्थ स्कोर देती है।

    बीमारियों की शुरुआती स्टेज में होगी पहचान
    इससे डॉक्टर समझ लेते हैं कि क्या बीमारी है और उसके आधार पर इलाज करने में मदद मिलती है। उनका कहना है कि इस आसान डायग्नोस सिस्टम से बीमारी का पता शुरुआती समय पर ही चल जाएगा और मरीजों को इलाज समय पर मिल जाएगा। इससे फेफड़ों के कैंसर जैसी बीमारियों को शुरुआती स्टेज पर पहचानने में मदद मिल सकेगी।

    Share:

  • जीएसटी कटौती का असर खत्म, साबुन-तेल से लेकर रोजमर्रा के सामान पांच फीसदी तक महंगे

    Thu Feb 19 , 2026
    नई दिल्ली। जीएसटी (GST) दरों में कटौती (Cut) पिछले साल सितंबर में लागू होने के बाद आम लोगों (common people) को बड़ी राहत मिली थी, जब साबुन, शैंपू, टूथपेस्ट और तेल जैसी रोजमर्रा की वस्तुएं सस्ती हो गई थीं। हालांकि, अब वह राहत खत्म हो रही है, क्योंकि एफएमसीजी कंपनियां (FMCG companies) इनपुट लागत में बढ़ोतरी के […]
    सम्बंधित ख़बरें
    लेटेस्ट
    खरी-खरी
    का राशिफल
    जीवनशैली
    मनोरंजन
    अभी-अभी
  • Archives

  • ©2026 Agnibaan , All Rights Reserved