
यरुशलम। भारत और इजरायल (India and Israel) के बीच कूटनीतिक संबंधों के एक नए अध्याय की शुरुआत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने बुधवार को इजरायली संसद ‘नेसेट’ (Israeli Parliament ‘Knesset’) को संबोधित किया। नेसेट को संबोधित करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बनकर मोदी ने न केवल इतिहास रचा, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की शांतिप्रिय और आतंकवाद विरोधी छवि को और मजबूती से पेश किया। अपने 31 मिनट के भाषण में पीएम मोदी ने गाजा शांति पहल का समर्थन करते हुए क्षेत्र में स्थायी शांति की वकालत की।
इजरायली सांसदों और शीर्ष नेतृत्व के सामने प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट रूप से कहा कि भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा समर्थित गाजा शांति पहल का पुरजोर समर्थन करता है। उन्होंने कहा, “यह पहल न केवल संघर्ष को समाप्त करने का मार्ग प्रशस्त करती है, बल्कि इस पूरे क्षेत्र के लोगों के लिए एक न्यायसंगत और स्थायी शांति की उम्मीद जगाती है। इसमें फिलिस्तीन मुद्दे का समाधान भी शामिल है।”
मोदी ने इजरायली प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि शांति की राह कठिन जरूर है, लेकिन संवाद और साहस के जरिए ही स्थिरता लाई जा सकती है। उन्होंने विश्वास जताया कि शांति पहल से इस अशांत क्षेत्र में एक नया सवेरा होगा।
मुंबई हमले का भी जिक्र
संसद में अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री ने आतंकवाद के मुद्दे पर इजरायल की भावनाओं को छुआ। उन्होंने 7 अक्टूबर को इजरायल पर हुए हमास के हमले और मुंबई में हुए 26/11 के आतंकी हमले को एक ही सूत्र में पिरोते हुए कहा कि भारत आतंकवाद का दर्द पिछले कई दशकों से झेल रहा है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “आतंकवाद का कोई भी कारण नागरिक हत्याओं को सही नहीं ठहरा सकता। आतंकवाद के खिलाफ भारत की नीति ‘जीरो टॉलरेंस’ की है और इसमें कोई दोहरा मापदंड नहीं होना चाहिए।” पीएम मोदी ने कहा कि आतंकवाद केवल समाज को अस्थिर नहीं करता, बल्कि विकास और विश्वास को भी नष्ट करता है। इस दौरान पूरा सदन तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
अब्राहम समझौते और भविष्य की उम्मीदें
पीएम मोदी ने अमेरिका की मध्यस्थता में हुए ‘अब्राहम समझौते’ की सराहना करते हुए इसे एक साहसी दृष्टिकोण बताया। हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि 7 अक्टूबर के हमलों के बाद स्थितियां काफी बदल गई हैं और चुनौतियां बढ़ी हैं, लेकिन उन्होंने उम्मीद की लौ जलाए रखने पर जोर दिया।
भारत में यहूदी समुदाय के योगदान की सराहना करते हुए पीएम मोदी ने गर्व के साथ कहा कि सदियों से यहूदी भारत में बिना किसी भेदभाव के रहते आए हैं। उन्होंने दोनों देशों के 2,000 साल पुराने सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंधों को रेखांकित किया। उन्होंने रक्षा, जल प्रबंधन, कृषि और तकनीक के क्षेत्र में बढ़ते सहयोग का भी जिक्र किया।
नेतनयाहू ने बताया ‘भाई’
प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत किसी राष्ट्रप्रमुख से बढ़कर एक आत्मीय मित्र की तरह किया गया। इजरायली पीएम बेंजामिन नेतनयाहू ने उन्हें ‘भाई’ कहकर संबोधित किया और कहा कि मोदी सत्य और इजरायल के साथ मजबूती से खड़े रहे हैं। वहीं, नेसेट के स्पीकर अमीर ओहाना ने मोदी की तुलना राजा डेविड से करते हुए उन्हें एक ‘राजनेता और कवि’ करार दिया। विपक्ष के नेता यायिर लापिड ने भी संकट के समय इजरायल के साथ खड़े रहने के लिए प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व की सराहना की।
प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा के दौरान भारत और इजरायल कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर करने वाले हैं। गुरुवार को दोनों देश रक्षा, सुरक्षा, नवाचार और आर्थिक सहयोग के क्षेत्रों में अपने रिश्तों को एक नई ऊंचाई पर ले जाएंगे। यात्रा के दौरान मोदी ‘याद वाशेम’ स्मारक भी जाएंगे और भविष्य की रूपरेखा तैयार करने के लिए द्विपक्षीय बैठकों में हिस्सा लेंगे।
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