
नई दिल्ली। ईरान (Iran) की राजधानी तेहरान (Tehran) में हुए बड़े हमले से पहले कथित तौर पर ऐसी जासूसी (spying) की गई, जिसने सुरक्षा एजेंसियों को संभलने तक का मौका नहीं दिया। एक अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई (Ayatollah Ali Khamenei) की गतिविधियों पर लंबे समय से नजर रखी जा रही थी और हमले से पहले उनकी लोकेशन व सुरक्षा व्यवस्था की सटीक जानकारी जुटा ली गई थी।
ट्रैफिक कैमरे और मोबाइल नेटवर्क तक पहुंच
लंदन के अखबार Financial Times की रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल की खुफिया एजेंसियों ने तेहरान के ट्रैफिक कैमरों को कथित रूप से हैक कर लिया था। इन कैमरों की फुटेज एन्क्रिप्टेड तरीके से तेल अवीव और दक्षिणी इजरायल के सर्वरों तक पहुंचाई जा रही थी। रिपोर्ट में दावा है कि मोबाइल फोन नेटवर्क में भी सेंध लगाई गई, जिससे सुरक्षा बलों की मूवमेंट, ड्यूटी शेड्यूल और संभावित प्रतिक्रिया क्षमता का आकलन किया जा सका।
बॉडीगार्ड्स की गतिविधियों पर नजर
सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि सुरक्षा कर्मियों के पते, ड्यूटी घंटे और तैनाती से जुड़ी जानकारी जुटाने के लिए जटिल एल्गोरिदम और सोशल नेटवर्क एनालिसिस का इस्तेमाल हुआ। यह भी पता लगाया गया कि कौन-सा कमांडो किस वरिष्ठ अधिकारी की सुरक्षा में तैनात है। पाश्चर स्ट्रीट जहां कई शीर्ष सरकारी संस्थान स्थित हैं, के आसपास के रूटीन और पार्किंग पैटर्न तक का विश्लेषण किया गया।
सिग्नल इंटेलिजेंस और मानव स्रोत
रिपोर्ट में बताया गया कि इजरायल की सिग्नल इंटेलिजेंस यूनिट 8200, मोसाद द्वारा जुटाए गए मानव स्रोत और मिलिट्री इंटेलिजेंस के विश्लेषण से एक व्यापक ‘इंटेलिजेंस पिक्चर’ तैयार की गई। हमले के दिन यह पुष्टि करने के लिए कि खामेनेई और अन्य वरिष्ठ अधिकारी परिसर में मौजूद हैं, कथित तौर पर सिग्नल इंटेलिजेंस के साथ एक अमेरिकी मानव स्रोत से भी संकेत मिला, जिसके बाद ऑपरेशन को हरी झंडी दी गई।
‼️WATCH: For the first time since the start of Operation ‘Roaring Lion’, the IAF is striking targets belonging to the Iranian terror regime in the heart of Tehran.
Over the past day, the IAF conducted large-scale strikes to establish aerial superiority and pave the path to… pic.twitter.com/DN2MkGCfWc
— Israel Defense Forces (@IDF) March 1, 2026
मोबाइल टावरों में कथित बाधा
रिपोर्ट में यह भी दावा है कि पाश्चर स्ट्रीट के पास कई मोबाइल टावरों के कुछ हिस्सों को निष्क्रिय किया गया, जिससे कॉल कनेक्ट होने में दिक्कत आई। इसका असर यह हुआ कि सुरक्षा टीम तक संभावित खतरे की चेतावनी समय पर नहीं पहुंच सकी।
तेहरान की गली-गली की जानकारी
एक इजरायली खुफिया अधिकारी के हवाले से कहा गया कि हमले से काफी पहले तेहरान की भौगोलिक और सुरक्षा संरचना को उसी स्तर पर समझ लिया गया था, जैसे यरुशलम को समझा जाता है। रिपोर्ट के अनुसार, अरबों डेटा पॉइंट्स का विश्लेषण कर निर्णय लेने वाले केंद्रों और संभावित लक्ष्यों की पहचान की गई थी।
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