
नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने कहा कि पृथ्वी के संरक्षण में ही (In protection of the Earth) मानवता का कल्याण निहित है (Welfare of Humanity Lies) ।
उन्होंने विश्व पृथ्वी दिवस के मौके पर कहा कि पृथ्वी की रक्षा करना सिर्फ एक जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक पवित्र संकल्प भी है, जिसे हमें पूरी ईमानदारी से निभाना चाहिए। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, “पृथ्वी हमारी माता है और इसके संरक्षण में मानवता का कल्याण निहित है। इसकी रक्षा करना हम सबका केवल दायित्व नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारा पवित्र संकल्प भी है। यस्यां वृक्षा वानस्पत्या ध्रुवास्तिष्ठन्ति विश्वहा। पृथिवीं धेनुं प्रदुहां न उदिच्छन्तु नमोऽस्तु पृथिव्यै ।”
केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा, “यह ‘विश्व पृथ्वी दिवस’ हमें याद दिलाता है कि आज हमारे द्वारा किए गए कार्य ही हमारे ग्रह के भविष्य को आकार देते हैं। पर्यावरण की देखभाल करना हमारे दैनिक जीवन का एक अभिन्न अंग बन जाना चाहिए।” उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में, ‘स्वच्छ भारत अभियान’ और ‘एक पेड़ माँ के नाम’ जैसे कार्यक्रम लोगों को आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वच्छ और हरित भविष्य के निर्माण में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।”
इस मौके पर उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर पोस्ट कर प्रदेश वासियों को विश्व पृथ्वी दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी। उन्होंने लिखा, “सनातन संस्कृति में धरती की व्याख्या मां के रूप में की गई है, जो चराचर जगत का नि:स्वार्थ भाव से पोषण करती हैं। आइए, ‘विश्व पृथ्वी दिवस’ के अवसर पर हम सभी प्राणदायिनी धरा को प्रदूषण से मुक्त और वृक्षों से युक्त करने का पावन संकल्प लें।”
वहीं, उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा, “समस्त प्रदेशवासियों को विश्व पृथ्वी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। स्वच्छ, हरित और सुरक्षित वातावरण केवल आज की आवश्यकता नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला है। यह दिवस हमें प्रकृति के प्रति अपने दायित्वों का स्मरण कराता है। आइए, इस अवसर पर हम सभी संकल्प लें कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति सजग रहेंगे, प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग करेंगे तथा जल, जंगल और जमीन की रक्षा में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाएंगे।”
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